UP Election Result 2022: बसपा (BSP) में किनारे किये जाएंगे सतीश मिश्र! जानिये क्या है मायावती की नई रणनीति

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UP Election Result 2022: बसपा (BSP) में किनारे किये जाएंगे सतीश मिश्र! जानिये क्या है मायावती की नई रणनीति

लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव (UP assembly election 2022) में करारी हार के बाद मायावती बेहद नाराज बताईं जा रहीं हैं। 2022 के रण में बड़ी जिम्मेदारियां संभालने वाले नेताओं पर गाज गिर सकती है। इसमें से एक नाम सतीश चंद्र मिश्र का भी बताया जा रहा है। बसपा के सूत्रों का दावा है कि लगातार पार्टी कमजोर होती जा रही है, इसका सबसे बड़ा कारण सतीश मिश्र को माना जा रहा है। पार्टी छोड़कर गये बड़े नेताओं ने भी सतीश मिश्र का नाम लिया था लेकिन मायावती (Mayawati) ने कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन, अब 2022 के चुनावी परिणामों के बाद सतीश मिश्र पर भी गाज गिर सकती है। इतना ही नहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि बसपा में उन पुराने नेताओं को एक बार फिर से जोड़ा जा सकता है जो कहीं नहीं गये हैं। होली के बाद मायावती समीक्षात्मक बैठकों का दौर भी शुरू कर सकतीं हैं। साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों की रणनीति भी बना सकतीं हैं। हालांकि, अभी इसकी डेडलाइन तय नहीं है।

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दो सफलता के बाद असफलताओं का दौर
2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा को पूर्ण बहुमत से मिली सत्ता के पीछे सुप्रीम कोर्ट के वकील सतीश मिश्र का नाम सामने आया था। जिसमें दलित-ब्राह्मण गठजोड़ को सोशल इंजीनियरिंग का नाम दिया गया था। उसके बाद से बसपा में सतीश मिश्र का कद लगातार बढ़ता गया। यहां तक कि बसपा (BSP) संस्थापक कांशीराम और मायावती के साथ शुरूआती दिनों से जुड़े कई बड़े नेता एक के बाद एक पार्टी से किनारे होते गये लेकिन सतीश मिश्र लगातार बसपा के रणनीतिकारों में बने रहे। एक दौर वह भी आया जब मायावती से सीधे मिलने वालों में सतीश मिश्र, उनके दामाद परेश मिश्र आदि ही हुआ करते थे। इस बीच 2009 के लोकसभा चुनाव में भी बसपा को अच्छी सफलता मिली थी। जिसमें सतीश मिश्र का जादू सिर चढ़कर बोला। उसके बाद 2012 के विधानसभा के बाद 2014 के लोसभा चुनाव में बसपा का खाता तक नहीं खुला। फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा को मात्र 19 सीटें मिलीं तो वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा गठबंधन का लाभ मिला तो बसपा के 10 सांसद चुन लिये गये। 2022 के चुनाव में मायावती ने अकेले लड़ने का निर्णय लिया और पूरी 403 विधानसभा सीटों पर लड़ने के बाद मात्र एक विधायक चुना गया। वोट प्रतिशत में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। इससे मायावती बेहद नाराज बताईं जा रहीं हैं। इन सभी चुनावों में मायावती के बाद सतीश मिश्र ही वो शख्स थे जो निर्णय ले सकते थे। खासकर 2022 के विधानसभा चुनाव में मायावती के बाद अगर कोई सबसे आगे थे तो वह सतीश मिश्र का परिवार था। इस चुनाव में सतीश मिश्र ने दावा किया था कि 2007 का करिश्मा दोहरायेंगे और 90 फीसदी ब्राह्मण वोटबैंक बसपा के साथ आयेगा। लेकिन, ठीक इसे विपरित परिणाम आया है। ऐसे में मायावती अब सतीश मिश्र से नाराज बताईं जा रहीं हैं। चुनावी परिणाम के बाद से ही सतीश मिश्र का पूरा परिवार अब परिदृश्य में पीछे दिखाई दे रहा है।

पुराने नेताओं पर फिर भरोसा
बसपा के सूत्रों का दावा है कि पार्टी से निकाले गये बड़े नेताओं को एक बार फिर वापस लाने की कवायद की जा सकती है। जिसमें सबसे बड़ा नाम पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह का है। गौरतलब है कि कभी जय प्रकाश सिंह मायावती के सबसे खास नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने राहुल गांधी पर विदेशी नश्ल की टिप्पणी का खामियाजा पार्टी से बाहर होकर भुगतना पड़ा था। लेकिन, वो किसी दूसरे दल में नहीं गये, लगातार बसपा का प्रचार करते रहे। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव के पहले पूरे प्रदेश में रथयात्रा निकालकर मायावती को पांचवी बार मुख्यमंत्री बनाने का आह्वान किया था। वहीं इसके अलावा कई और नेता भी इस लिस्ट में हैं। सूत्रों का दावा है कि मायावती उनसे बात कर सकतीं हैं।

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बसपा लौटेगी पुराने रास्ते पर
2007 और 2009 की सफलता के बाद लगातार बसपा का ग्राफ गिरता जा रहा है। 2022 के परिणामों (Assembly election result 2022) ने पार्टी के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। दलित और ब्राह्मण गठजोड़ी की संभावनाओं को लेकर लगातार मिल रही असफलता के बाद यह दावा किया जा रहा है कि बसपा अब पुराने ट्रैक पर लौट सकती है। जातिवार छत्रपों की एक बार फिर से फौज तैयार की जा सकती है या पुराने नेताओं को शामिल कर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि मायावती जल्द ही इस पुराने फॉर्मूले पर काम करना शुरू कर सकतीं हैं।

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