लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी से पूर्व कैबिनेट मंत्री नकुल दुबे को बाहर कर दिया गया है। नकुल दुबे को पार्टी से बाहर किये जाने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। अब यह बात जोर पकड़ने लगी है कि बसपा में सतीश मिश्र की पकड़ लगातार ढीली पड़ती जा रही है। यूपी के चुनावों में मिली करारी हार के बाद मायावती लगातार समीक्षाएं कर रहीं हैं। अब उन्हें आभास होने लगा है कि पार्टी से पुराने और छत्रप नेताओं को बाहर करने का निर्णय आत्मघाती साबित हुआ है।
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ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी में वापसी के लिए मायावती ने कई नेताओं से बात की है। जिसमें इन नेताओं ने मायावती के सामने कई शर्तें रखीं हैं। यही कारण है कि मायावती अब बसपा में उस धड़े पर कार्रवाई कर रहीं हैं, जिनका पार्टी में सबसे बड़ा रसूख हुआ करता है। गौरतलब है कि नकुल दुबे को सतीश मिश्र का सबसे करीबी माना जाता है। ऐसे में मायावती ने उन पर एक्शन लेकर यह साफ संकेत दे दिया है कि सतीश मिश्र गुट को भी अब बख्शा नहीं जाएगा।
सतीश मिश्र से नाराज हैं पुराने नेता
बसपा में मायावती के सबसे करीबियों में सतीश मिश्र ही माने जाते हैं। फिलहाल वो पार्टी में महासचिव हैं और हाल ही में उनका राज्यसभा का कार्यकाल भी समाप्त हुआ है। पार्टी से बाहर किये गये पुराने नेताओं की सबसे बड़ी नाराजगी सतीश मिश्र से ही मानी जाती है। सूत्रों ने बताया कि बसपा को एक बार फिर से खड़ा करने के लिए मायावती लगातार जुटी हुईं हैं। वो पार्टी में पुराने नेताओं की वापसी कराने के लिए भी बातचीत कर रहीं हैं।
सूत्रों का दावा है कि मायावती ने जितने भी नेताओं से पार्टी में वापसी के लिए बात की है, सभी ने सतीश मिश्र के प्रति नाराजगी जाहिर की है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन बसपा में कभी मायावती के बेहद करीबी रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री ने नाम नहीं छापने की शर्त पर इस बात की पुष्टि की है कि सबकी नाराजगी सतीश मिश्र से ही है। वो कहते हैं कि बसपा सिर्फ राजनीतिक दल नहीं बल्कि दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और शोषितों के लिए मिशन है। उनके हक-हुकूक की लड़ाई लड़ने का जरिया है। जिसे सतीश मिश्र ने धीरे-धीरे कर खोखला कर दिया है।
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सतीश मिश्र ने यूपी चुनाव की संभाली थी कमान
यूपी के विधानसभा चुनाव की कमान पूरी तरह से सतीश मिश्र ने संभाली थी। उन्होंने मायावती को भरोसा दिलाया था कि 2007 की तरह इस बार भी दलित-ब्राह्मण गठजोड़ का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला कामयाब होगा। इसको लेकर उन्होंने परशुराम की मूर्ति बनाने से लेकर प्रदेश भर में प्रबुद्ध सम्मेलन किये थे। जिसके जरिये उन्होंने ब्राह्मणों को जोड़ने का भरोसा दिलाया था। साथ ही बसपा की सोशल मीडिया की कमान भी उनकी ही टीम ने संभाली थी। लेकिन, परिणाम उम्मीदों के बिल्कुल विपरित रहे। जिसके बाद से मायावती सतीश मिश्र से नाराज बताईं जा रहीं हैं।
सोशल मीडिया पर खड़े हो रहे सवाल, क्या अगला नंबर मिश्रा का?
नकुल दुबे पर कार्रवाई के बाद अब सोशल मीडिया पर मायावती के अगले निर्णयों को लेकर टिका-टिप्पणी शुरू हो चुकी है। सोशल मीडिया यूजर लगातार सवाल कर रहे हैं कि क्या अगला नंबर अब सतीश मिश्र का है। क्योंकि, नकुल दुबे उनके सबसे करीबियों में शुमार रहे हैं। साथ ही सतीश मिश्र के करीबी रहे दूसरे कई बड़े नेता बसपा छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। जिन्हें बसपा से एमएलसी लेकर राज्यसभा तक बनाया था। ऐसे में इन सबके बीच अटकलों का बाजार गर्म है कि क्या मायावती के कोपभाजन का अगला शिकार सतीश मिश्र होंगे?

