नई दिल्ली। पूरी दुनिया में इस समय नस्लवाद का मुद्दा गर्माया हुआ है. अमेरिका में पुलिस कस्टडी में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से दुनिया के हर कोने से नस्लवाद के खिलाफ आवाज उठ रही है. वेस्टइंडीज के क्रिकेटर डैरेन सैमी, क्रिस गेल भी इसके खिलाफ आवाज उठा चुके हैं. हाल ही में आउटलुक को दिए एक इंटरव्यू में सैमी ने भारत से बड़ा सवाल पूछा. सैमी ने पूछा कि आखिर क्यों भारत में एक क्रीम को फेयर एंड लवली कहा जाता है. क्यों भारत एक ऐसी क्रीम को अपनाते हुए आया.
क्यों स्वीकार किया नाम
अपनी कप्तानी में 2016 में वेस्टइंडीज को टी20 वर्ल्ड कप दिलाने वाले सैमी ने कहा कि भारत में नस्ल और रंग में इतनी विविधता है, जो इतना भेदभाव पैदा करती है ,उस देश ने फेयर एंड लवली जैसे प्रोडक्ट को आखिर क्यों स्वीकार किया.
नस्लवाद की तरफ इशारा
सैमी ने कहा कि आपका विज्ञापन फेयर एंड लवली कहता है कि सिर्फ गोरे लोग ही प्यारे होते हैं. वह सिर्फ इसी चीज का विज्ञापन करता है. यह विज्ञापन साफतौर पर नस्लवाद की तरफ ही इशारा करता है. कैरेबियाई खिलाड़ी ने कहा कि हमें लोगों को ज्यादा शिक्षित करने की जरूरत है. सैमी ने कुछ दिन पहले आरोप लगाया था कि आईपीएल में उनकी टीम सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाड़ी उन्हें कालू कहते थे और उन्होंने उनसे माफी की भी मांग की थी, हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें पता चला कि टीम के खिलाड़ी उन्हें ऐसा प्यार से कहते थे. सैमी ने कहा कि मगर ऐसे किसी भी शब्द के बारे में उन्हें जरूर बताया जाना चाहिए. 36 साल के इस ऑलराउंडर ने कहा कि उनके पास भारत से जुड़ी काफी यादें हैं.
नाम बदलने की तैयारी
नस्लवाद का मुद्दा गर्माने के बाद फेयर एंड लवली ने इसका दोबारा नाम बदलकर बाजार में उतारने का फैसला किया. व्यक्तिगत देखभाल प्रभाग के अध्यक्ष सनी जैन ने एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा था कि हम पहचानते हैं कि फेयर, सफेद या लाइट जैसे शब्दों का सुंदरता को दर्शाने के लिए किया जाता रहा है, मगर हम ऐसा नहीं मानते, इसीलिए हम इसे बदलना चाहते हैं.

