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सरकार गिराने पर भी सचिन नही होंगे भाजपा के सीएम

फीचर्डसरकार गिराने पर भी सचिन नही होंगे भाजपा के सीएम

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सरकार गिराने पर भी सचिन नही होंगे भाजपा के सीएम

  • वसुंधरा पर भरोसा जताने के मूड में हाईकमान
  • सचिन का दावा कि अल्पमत में कांग्रेस सरकार

खालिद इकबाल

राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बुलाई गई विधायक दल की बैठक में शामिल होने से इनकार किया है। राज्य के राजनीतिक हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई है, जिसमें डिप्टी सीएम सचिन पायलट शामिल नहीं होंगे।दिल्ली में डेरा डाले सचिन पायलट ने इसके साथ-साथ यह भी दावा किया कि उन्हें 30 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है और गहलोत सरकार अल्पमत में है।बता दें कि मध्य प्रदेश और ज्योतिरादित्य सिंधिया को खोने के तीन महीने बाद कांग्रेस राजस्थान में भी गहरे संकट में है। जिसका कारण है राज्य में पार्टी के पुराने गार्ड और नए के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचतान।राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट आजकल बीजेपी के साथ बातचीत कर रहे हैं, ऐसा उनके करीबी सूत्रों ने कहा है। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में चर्चा लॉकडाउन के पहले से चल रही है।लेकिन हालात तब बिगड़े जब सरकार को अस्थिर करने के आरोपों पर सचिन पायलट को ही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने पूछताछ के लिए समन भेज दिया।

राजस्थान के सियासी संकट से जुड़ी कुछ खास बातें

राज्य के राजनीतिक हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई है, जिसमें डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने शामिल होने से इनकार कर दिया है। दिल्ली में डेरा डाले सचिन पायलट ने यह भी दावा किया कि उन्हें 30 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है और गहलोत सरकार अल्पमत में है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज रात अपने आवास पर विधायकों से साथ बैठक भी की है। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट पर सवाल उठाने के आदेश जारी करने से नाराज है।पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “सोनिया और राहुल गांधी दोनों को स्थिति के बारे में जानकारी दी गई है। हमें विश्वास है कि हम मध्य प्रदेश की स्थिति को फिर से नहीं बनने देंगे।
अशोक गहलोत के सहयोगियों ने कहा कि उन्होंने बैठक में भाग लेने के लिए सचिन पायलट को आमंत्रित किया है, लेकिन उनसे संपर्क करने में विफल रहे. सूत्रों ने कहा, “हमने इस बैठक का आयोजन बीजेपी को रोकने के लिए किया है, जो मध्यप्रदेश या मणिपुर की तरह खेल के नियमों को बदलती रहती है।सूत्रों ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरत रहे हैं कि हमारे सभी एमएलए मौजूद हैं।

सूत्रों ने कहा कि बीजेपी ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद का ऑफर देने से इनकार कर दिया है।पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पास 45 विधायकों का समर्थन है और उनकी पहली प्राथमिकता अब अशोक गहलोत सरकार को गिराने की है। नेताओं के एक वर्ग ने कहा कि सचिन पायलट ने कांग्रेस आलाकमान को संकेत दिया है कि वह एक क्षेत्रीय पार्टी बनाने के लिए तैयार हैं और बीजेपी में शामिल नहीं होंगे।

सूत्रों ने कहा कि सचिन पायलट को राज्यसभा चुनाव से पहले हॉर्स-ट्रेडिंग की जांच में पूछताछ के लिए उपस्थित होने के लिए कहा गया था।राजस्थान के मुख्य सचेतक महेश जोशी द्वारा राज्यसभा चुनाव से पहले दायर की गई शिकायत पर शुक्रवार को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप द्वारा पायलट को तलब किया गया था। सचिन पायलट के विश्वासपात्र विधायकों ने जांच के आदेश के बाद विद्रोह की धमकी दी है। पायलट के करीबी सूत्रों ने कहा, “इससे पहले कभी राज्य अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री को इस तरह का पत्र नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “आलाकमान ने हस्तक्षेप करने के लिए कुछ नहीं किया है.”

गहलोत ने कहा है कि उन्हें मुख्य सचेतक के साथ-साथ पूछताछ के लिए सम्मन भी मिला है और सहयोग करना उनका कर्तव्य है। “कोई भी कानून से ऊपर नहीं है,” सूत्रों ने उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया।गहलोत ने कल कहा कि बीजेपी पाला बदलने के लिए विधायकों को 15 करोड़ रुपये तक दे रही है।गहलोत ने कल शाम एक टीवी चैनल एसे कहा, “आपने इसे गोवा, मध्य प्रदेश और उत्तर-पूर्वी राज्यों में देखा।

सचिन पायलट 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे थे,उन्हें उप मुख्यमंत्री का पद दिया गया। लेकिन यह राज्य कांग्रेस प्रमुख के पद का पुरस्कार था, राज्य में पार्टी के पुनर्निर्माण के लिए उनके काम को मान्यता दी गई थी, जिसने गहलोत को नाराज किया।सचिन पायलट के 6 साल तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को संभालने के बाद अब उन्हें हटाने की भी बातचीत चल रही है।

सरकार बनने के बाद से सचिन पायलट और मुख्यमंत्री के बीच मतभेद नियमित रूप से सामने आते रहे हैं।पिछले साल, लोक सभा चुनावों के बाद, गहलोत ने अपने बेटे की हार के लिए पायलट को दोषी ठहराया। “पायलट को जिम्मेदारी लेनी चाहिए,” मुख्यमंत्री ने कहा था। 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के पास मजबूत 107 सीटें हैं और उसे 12 निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन प्राप्त है। इसके अलावा, अन्य दलों के पांच एमएलए – राष्ट्रीय लोक दल, सीपीएम और भारतीय ट्राइबल पार्टी गहलोत का समर्थन करते हैं।

हालांकि सियासत में हर घड़ी उलटफेर की संभावना बनी रहती है और किसी भी तरह का दावा पल भर में गलत साबित हो सकता है। लेकिन जिस तरह का घटनाक्रम राजस्थान सरकार को लेकर करवट बदल रहा है और मीडिया रिपोर्ट्स आ रही है,उससे साफ जाहिर है कि इस समय सारा दारोमदार सचिन पायलट के फैसले पर टिका है। जिस तरह की चर्चा है कि सोमवार को सचिन पायलट की मुलाकात ग्रह मंत्री अमित शाह से होने वाली है और सचिन की तरफ से किया गया दावा भी कांग्रेस के लिए मुसीबत बन सकता है। इतना जरूर कहा जा सकता है कि अगर सचिन पायलट ने कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थामा तो किस्मत ही कांग्रेस की सरकार को बचा सकती है,अन्यथा कमलनाथ सरकार की तरह होने वाले उलटफेर की पुनरावृत्ति संभव है।

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