देहरादून। दो महीने पहले परिजनों ने बड़े जतन से एमबीबीएस में एडमिशन कराकर यूक्रेन पढ़ने के लिए भेजा था। आंखों में डाक्टर बनने का सपना लेकर वह यूक्रेन पहुंचा। दो महीने तक खुद को पांच साल के लिए सेटल करने में लगा रहा। 24 फरवरी की सुबह नींद खुली तो पता चला कि यूक्रेन पर रुस ने हमला (Russia attacked Ukraine) कर दिया है। इसके बाद हालात खराब होते चले गए। वह भी अपने मित्रों के साथ वापस लौटने के प्रयास में लग गया। यह कहना है देहरादून के रहने वाले मनीष थापा का। जिसने हालात गंभीर होते देख लवीव में रह रहे अपने दोस्तों से संपर्क किया। थाना अपने दोस्तों के साथ उसी रात बस से इवानों पहुंच गया और अपने कालेज के हास्टल में छुपे रहे। इसी दौरान भारतीय दूतावास की एडवाइजरी जारी हुई। जिसके बाद मनीष अपने दोस्तों के साथ रोमानिया बार्डर की ओर चल दिए। रोमानिया बार्डर पहुंचकर मनीष ने पुराने छात्रों की सहायता से रोमानिया जाने के लिए बस बुक की। लेकिन रोमानिया बार्डर पर वाहनों का जाम लगने के कारण बस चालक ने उनको 20 किमी पहले ही छोड़ दिया। जिसके बाद से अपने दोस्तों के साथ 20 किमी तक का पैदल सफर कर रोमानिया में प्रवेश करने की कोशिश में जुट गए। रोमानिया में पहले यूक्रेन के निवासियों को बार्डर पार करवाया जा रहा था। जिसके बावजूद वे तमाम कोशिशों से जूझते हुए बार्डर पार कर रोमानिया के भीतर प्रवेश करने में सफल रहे और वहां से भारतीय विमान में सवार होकर वापस दिल्ली पहुंचे उसके बाद वहां से देहरादून आए।
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मनीष की आंखों में रुस और यूक्रेन (Russia and Ukraine crisis) के बीच हो रहे युद्ध का खौफ अब भी हैै। उन्होंने रुस की ओर से हो रही भीषण बमबारी का खौफनाक मंजर देखा है। नवीन थापा के पुत्र मनीष थाना इवानो में इवानो फ्रांसिस यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस पहले वर्ष में प्रवेश लिया था। पिता नवीन थापा सेना में सूबेदार पर पर हैं। घर पहुंचने पर मनीष ने अपने परिवार और मीडिया से आपबीती बताई है। उन्होंने बताया कि बमबारी से जूझ रहे यूक्रेन में खाने-पीने के सामान का संकट खड़ा है। वहां पर एटीएम काम नहीं कर रहे।

