न्यूयार्क। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गत शुक्रवार को चार यूक्रेनी क्षेत्रों के रूस में विलय की घोषणा की थी। जिसके बाद से अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र,यूरोपियन देश और अन्य देशों ने इसकी कड़ी निंदा की थी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन के चार इलाकों में कब्जे को लेकर रूस की निंदा के प्रस्ताव पर वोटिंग के लिए सभी सदस्यों को बुलाया गया। जिसमें अधिकार मित्र देशों ने रूस ने वीटो कर दिया। अमेरिका की ओर से लाए वीटो प्रस्ताव का अल्बानिया ने समर्थन किया। इस प्रस्ताव में यूक्रेन देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। रूस द्वारा वीटो किए जाने के कारण प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका। 15 देशों की सुरक्षा परिषद में से, 10 देशों ने प्रस्ताव के लिए मतदान किया और चार देशों ने इसके मतदान में ही भाग नहीं लिया। इन चार देशों में चीन, भारत, ब्राजील और गैबॉन।
यूएनएससी में भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि किसी तरह की बयानबाजी से तनाव बढ़ना किसी के हित में नहीं होता है। महत्वपूर्ण यह है कि दोनों ही देश बैठकर बातचीत से हल निकलने का प्रयास करें। मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर भारत इस प्रस्ताव से दूर रहने का फैसला किया है। उन्होंने आगे कहा कि यूक्रेन में उपजे हाल के घटनाक्रम से भारत बहुत ही परेशान है। भारत हमेशा से कह रहा है कि बातचीत से हल निकलना चाहिए। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि यह युद्ध का युग नहीं हो सकता। वहीं भारत की रुचिरा कंबोज के बोलने के दौरान रूस प्रतिनिधि फोन में कुछ करते दिखाई दिए थे।

