Zeba Hasan
सखी सैंया तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाय जात है…साल 2010 में आई फिल्म पीपली लाइव का यह गीत इन दिनों फिर से चर्चा में है। और इस बार महिलाएं यही कह रही हैं कि महंगाई डायन खाय जात है। दिनों दिन बढ़ती महंगाई ने हर किसी की कमर तोड़ दी है। जहां पेट्रोल, डीजल ने लोगों का गाड़ियों से मोह भंग कर दिया है वहीं अब महंगाई का असर गृहणियों के किचन पर पड़ गया है। जहां एक तरफ महंगे नींबू ने लोगों के दांत खट्टे कर दिए है वहीं भिंडी, परवल, बींस, शिमला मिर्च जैसी महंगी सब्जियों ने खाने की थाली का जायका ही बदल दिया है। यही वजह है कि महिलाएं इस महंगाई के दौर में अपने किचन की थाली को जुगाड़ से जायकेदार बना रही हैं।
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अब तो आलू टमाटर ही साथ हैं
भिंडी की कीमत 80 रुपए से 100 रुपए किलो तक है। परवल भी अस्सी और सौ में है। बींस, शिमला मिर्च का भी यही हाल है। अब हम सब्जी खाने वाले खाएं तो क्या खाएं। सब्जी की दुकान पर आईं पूनम अपना दर्द कुछ यूं बयां करती हैं। पूनम कहती हैं कि अब तो बस आलू और टमाटर का ही आसरा है। इसी सब्जी को हम नए – नए तरीके से बनाकर काम चला रहे हैं। कभी आलू का भर्ता तो कभी आलू टमाटर की सब्जी। कभी दम आलू तो कभी प्याज़ और टमाटर की सब्जी। अब घर में सभी को खाना तो अच्छा ही चाहिए लेकिन हमें अपने बजट के हिसाब से ही काम करना पड़ता है। हम सरकार से लड़ नहीं सकते लेकिन अपने खचों को कम करके काम चला रहे हैं।
तेल ने निकाल दिया है तेल
महंगाई की सबसे ज्यादा मार तो सरसों के तेल पर पड़ी है। यूं कहें कि तेल ने तो हर वर्ग का तेल ही निकाल दिया है। जहां गरीब एक बूंद में तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं वहीं मिडिल क्लास और अपर मिडिल क्लास फैमिलीज ने भी तेल की धार को कम कर दिया है। अब ना तो जल्दी पापड़ तले जाते हैं और ना ही शाम के नाशते में पकौड़ों की जल्दी कोई फरमाइश करता है। मिताली कहती हैं कि चार साल पहले तक नब्बे और सौ रुपए में मिलने वाला तेल का पैकेट आज 205 का हो गया है। जहां पहले हर दूसरे दिन पापड़ और पकौड़े फरमाइश पर बनाते थे अब ऐसा नहीं है। अब महीने में एक ही बार बना लूं तो बहुत है। अब खाना तो बिना तेल के बन नहीं सकता है तो दूसरी तरफ कटौती करके मैनेज करती हूं।
गैस ने बिगाड़ दिया बजट
रसोई में सबसे ज्यादा जिसने आग लगाई है वह है रसोई गैस। कभी 30 रुपए तो कभी 50 रुपए, धीरे धीरे बढ़ती रही कीमत और अब गैस सिलेंडर हो गया 1050 का। हुमा कहती हैं कि गैस की बजत बहुत मुश्किल हो जाती है। मैंने इनडक्शन खरीदा है जिस पर काफी चीजें तैयार कर लेती हूं। इसके अलावा हम महीने में दो दिन तो स्ट्रीट फूड खाकर ही काम चला लेते हैं। इससे गैस की बजत हो जाती है और बाकी समान की भी क्योंकि घर की रसोई तो अब बहुत ज्यादा महंगी हो गई है। जिस महीने में सिलेंडर जल्दी खत्म हो जाता है पूरे महीने का बजट बिगड़ जाता है। सब्जी, तेल, गैस सबकुछ इतना महंगा हो गया है कि महिलओं को महीने भर किचन का बजट बहुत ही जुगाड़ के साथ खर्च करना पड़ता है। पहले तो इसी पैसे में हम बचत भी करते थे लेकिन अब ऐसा मुमकिन नहीं होता और एक्स्ट्रा लग जाता है।
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ट्रांसपोर्ट और गर्मी है वजह
दुबग्ग सब्जी मंडी में सब्जी के अढ़ाती इंसराम कहते हैं कि सब्जी इस वक्त बहुत महंगी आ रही है। इसकी वजह यही है कि पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। बाहर से आने वली सब्जियां महंगी हो गई हैँ। इसके अलावा धूप और गर्मी के कारण प्रोडक्शन में भी कमी है। माल कम आ रहा है तो महंगा ही बिक रहा है।

