कभी नौकरी के नाम तो कहीं शादी के नाम पर लुटती रही अस्मत, आंकड़े कह रहे कहानी

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मेरठ। कहीं नौकरी दिलाने के नाम पर दोस्त ने किया दुष्कर्म तो कहीं ब्वाय फ्रेंड ने शादी का झांसा देकर लूटी आबरू। दुष्कर्म के आंकड़े काफी चौकाने वाले हैं। दुष्कर्म के अधिकांश मामलों में अपनों और दोस्तों ने ही अस्मत लूटी। इन मामलों में पहले दोस्ती और फिर शादी का सपना दिखाकर दुष्कर्म करके दोस्तों ने महिलाओं के साथ दगाबाजी की।

कमिश्नरेट बनने के बाद गाजियाबाद में 100 दिन में दर्ज दुष्कर्म के मामलों में दोस्ती में दगा देने के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। आंकड़े इसकी पुष्टि भी कर रहे हैं। ये मामले पिछले तीन सालों के मुकाबले सबसे अधिक हैं।

पांच माह में 33 मामले दुष्कर्म के दर्ज

बीते साल 30 नवंबर से 09 मार्च 2023 तक दुष्कर्म के 33 मामले सामने आए हैं। इनमें से दुष्कर्म के 25 मामले ऐसे दर्ज हुए जिसमें घटना काफी समय पहले हुई। जबकि अब आरोप लगाकर केस दर्ज करवाया गया। ऐसे मामलों में दोस्तों ने कभी शादी का झांसा देकर तो कभी नौकरी दिलाने या मदद करने का झांसा देकर दुष्कर्म किया।

हालांकि इनमें से कई ऐसे हैं जिन्हें पुलिस अधिकारी संदिग्ध मान रहे हैं और जांच की बात कह रहे हैं। पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि अधिकांश मामले सहमति से बने संबंधों के आए हैं। ऐसे मामलों की जांच कराई जा रही है।

केस-1
कवयित्री ने दरोगा पर कराया केस
कविनगर क्षेत्र की रहने वाली कवयित्री ने यूपी पुलिस के दरोगा पर चेकिंग के दौरान घर छोड़ने और बाद में दोस्ती करके दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। मामला 2022 का है। जिसमें कविनगर थाने में दिसंबर में केस दर्ज हुआ। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि दूसरी तरफ दोनों पक्षों में समझौता होने की बात चल रही है।
केस-2
शिक्षिका ने डीलर पर लगाया आरोप
कविनगर क्षेत्र की रहने वाली एक शिक्षिका ने नोएडा के प्रॉपर्टी डीलर पर दुष्कर्म करने और मंदिर में शादी के बाद छोड़ने का आरोप लगाया। मामले में शिक्षिका ने कविनगर थाने में केस दर्ज कराया। मामले में पुलिस जांच कर रही है। शिक्षिका का आरोप है कि प्रॉपर्टी डीलर ने कई साल उनके साथ दुष्कर्म किया था।

तीन साल के आंकड़े

अवधि दर्ज केस
30 नवंबर 2020 से 09 मार्च 2021 9
30 नवंबर 2021 से 09 मार्च 2022 15
30 नवंबर 2022 से 09 मार्च 2023 33

संस्कार दूसरे स्थान पर और पैसा प्राथमिक जरूरत

वरिष्ठ समाज शास्त्री जेएल रैना ने बताया आज के समय में समाज में परिवार में महिलाएं और पुरुष दोनों ही नौकरी पेशा हो गए हैं। ऐसे में सुबह को ऑफिस जाकर शाम को लौटते हैं। उनकेे लिए पैसा प्राथमिक जरूरत हो गई है जबकि संस्कार दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं।

इस बीच उन्हें नहीं पता कि बच्चे कहां जा रहे हैं। न ही वो बच्चों से बात करते हैं कि उनके बच्चे पूरे दिन किससे मिले। नौकरी के दौरान महिलाओं के संपर्क बढ़ जाते हैं। ऐसे में वह किसी से दोस्ती करें तो पहले उसकी परख जरूर कर लें। किसी पर आंख बंद कर विश्वास नहीं करें।