वे अल्लाह के बंदे हैं। अकीदत के मायने समझते हैं। वे अहले दिल हैं और सबकी फिक्र करना जानते हैं। यही वजह है कि रमजान के इस पाक महीने में वह अपनी इबादत के साथ दूसरों के रोजे का ख्याल भी रखते हैं। हम आज शहर के कुछ ऐसे लोगों से रूबरू कराने जा रहे हैं जो अपना रेस्टोरेंट चलाते हैं लेकिन रमजान के महीने में अपनी इनकम की फिक्र छोड़कर सवाब कमाने में यकीन रखते हैं। राहगीरों और अपने कस्टमर्स के लिए इफ्तारी का इंतजाम करते हैं और कहते हैं कि यही उनकी सबसे बड़ी कमाई है। रोजे के वक्त खाने से पहले ये रेस्टोरेंट वाले रोजेदार को पहले इफ्तार सर्व करते हैं इसके लिए वह किसी से पैसे नहीं लेते।
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इफ्तार के वक्त बंद हो जाती है दुकानदारी
आम से लेकर खास तक की जुबान पर चढ़े रहने वाले टुंडे कबाबी रेस्टोरेंट में इफ्तार के वक्त थोड़ी देर के लिए दुकानदारी थम सी जाती है। अमीनाबाद टुंडे कवाबी के सुपरवाइजर अजहर हुसैन कहते हैं कि मगरिब की अजान से पहले हम मेजों पर इफ्तारी सजा देते हैं। इसमें बेसन की पकौड़ियां, चने, केले, खजूर, शर्बत, शिकंजी, मटर आदि सर्व करते हैं। इफ्तार के वक्त जो भी रेस्टोरेंट में आता है फिर वह चाहे किसी भी धर्म को हो हम उसे इफ्तार की दावत देते हैं। कई राहगीर जो खरीदारी के लिए निकलते हैं, रोजे के वक्त बाजार में होते हैं वह भी इस इफ्तार का हिस्सा हो जाते हैं। यह परम्परा आज की नहीं है बल्कि कई साल से ऐसे ही चली आ रही है। इफ्तार के बाद फिर से हमारी दुकानदारी शुरू होती है।

शाम होते ही सज जाती है मेजें
लालबाग स्थित अलजायका की हर मेज रमजान में इफ्तारी के वक्त इफ्तार से सज जाती है। रेस्टोरेंट के प्रॉपराइटर मोहम्मद अनवर कहते हैं कि यह सिलसिला पूरे एक महीने तक चलता है। आमतौर पर सर्व होने वाले मेन्यू के अलावा रमजान में हम अपने यहां आने वाले लोगों के लिए खासतौर पर इफ्तारी का का इंतजाम करते हैं। इसमें प्याज की पकौड़ी, फ्रूट चाट, कभी सोयाबीन की बियानी तो कभी कोफती की बिरयानी। इफ्तार के वक्त हर आने वाले के लिए हमारे यहां इंतजाम होता है फिर वह चाहे कोई राहगीर हो या फिर कोई फैमिली। इफ्तार के वक्त इन दिनों 20, से 25 लोग आ ही जाते हैं। इफ्तार का हम कोई चार्ज नहीं लेते हैं। इफ्तार के बाद जिस जो खाना हो वह उसका ऑडर दे सकता है।
बाहर से आने वालों के लिए खास इंतजाम
शहर के दस्तरख्वान में भी इन दिनों इफ्तार का खास इंतजाम हो रहा है। रेस्टोरेंट के मैनेजर आदिल कहते हैं कि रमजान शुरू होते ही हम इफ्तार का इंतजाम करते हैं। अकसर लोग शहर के बाहर से भी आते हैं जिन्हें शहर के बारे में ठीक से मालूमात भी नहीं होती। उनके लिए हम खासतौर पर इफ्तारी का इंतजाम करते हैं। कई बार मार्केट में खरीदारी करते हुए लोगों को वक्त का पता नहीं चलता। रोजे का टाइम हो जाता है वह भी हekjमे यहां पर इफ्तार के लिए पहुंच जाते हैं। इफ्तारी के लिए हम कोई चार्ज नहीं करते। आलू-बेसन की पकोड़ी, खजूर, पापड़, चने वगैरह बनाते हैं। गर्मी को देखते हुए रूह-अफ्जा, खस और गुलाब का शर्बत भी सर्व करते हैं।
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अमीनाबाद है बड़ा बाजार
अमीनाबाद की वाहिद बिरयानी रेटोरेंट में भी रमजान में इफ्तार का खास इंतजाम किया जाता है। इन दिनों इस रेस्टोरेंट को संभाल रहे आबिद कहते हैं कि हम जहां बैठते हैं वह एक बड़ा बाजार है। सारे त्योहार की खरीदारी इस बाजार से होती है। रमजान में भी लोग सुबह से शाम तक खरीदारी करते हैं। ऐसे में हम उनके लिए जो इफ्तार के वक्त घर नहीं पहुंच पाते उनके लिए खासतौर पर इफ्तार का इंतजाम करते हैं।

