राजीव गांधी: कंप्यूटर क्रांति के साथ पंचायतों व महिलाओं को बनाया ताकतवर, रखी आधुनिक भारत की नींव

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कंप्यूटर शिक्षा, दूरसंचार और विज्ञान आधारित विकास को मिली राष्ट्रीय प्राथमिकता

जवाहर नवोदय विद्यालयों न बदली शिक्षा की तस्वीर

21 मई भारतीय राजनीति के उस अध्याय की याद दिलाती है, जब देश ने एक ऐसे युवा नेता को खो दिया था जिसने भारत को नई सदी के अनुरूप ढालने का सपना देखा था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उस सोच को याद करने का दिन भी है जिसने भारत को आधुनिक तकनीक, शिक्षा और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की राह पर आगे बढ़ाया।

1980 के दशक का भारत आज के डिजिटल भारत से बिल्कुल अलग था। सरकारी दफ्तरों में फाइलों का ढेर, टेलीफोन के लिए वर्षों का इंतजार और तकनीक को लेकर आशंकाओं का माहौल था। ऐसे समय में राजीव गांधी ने कंप्यूटर और सूचना तकनीक को भारत के भविष्य का आधार माना। उस दौर में विरोधियों ने कंप्यूटर को रोजगार छीनने वाला बताया, लेकिन राजीव गांधी ने इसे अवसर के रूप में देखा।

आज भारत जिस आईटी शक्ति के रूप में दुनिया में स्थापित है, उसकी शुरुआती नींव उसी दौर में रखी गई थी। सॉफ्टवेयर उद्योग, डिजिटल संचार और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की नीतियों ने आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक आईटी केंद्र बनने का रास्ता दिया। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों का तकनीकी विकास उसी दूरदृष्टि का परिणाम माना जाता है।

राजीव गांधी केवल तकनीक तक सीमित नेता नहीं थे। उन्होंने लोकतंत्र को गांवों तक मजबूत करने की कोशिश की। उनका मानना था कि दिल्ली से चलने वाली योजनाओं का लाभ तभी आम लोगों तक पहुंचेगा, जब गांवों को निर्णय लेने की वास्तविक ताकत मिले। इसी सोच के तहत पंचायतों को अधिक अधिकार देने और स्थानीय निकायों को मजबूत करने की पहल शुरू हुई। बाद में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के रूप में यह व्यवस्था और मजबूत हुई।

गांव की सरकार को अधिकार देने की यह सोच भारतीय लोकतंत्र में बड़ा बदलाव थी। इससे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर जनता की भागीदारी बढ़ी। पंचायतों में महिलाओं और पिछड़े वर्गों की भागीदारी का रास्ता भी इसी सोच ने तैयार किया।

महिला सशक्तीकरण को लेकर भी राजीव गांधी का दृष्टिकोण अपने समय से आगे माना जाता है। उन्होंने राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विचार भी उसी दौर में राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बना। आज लाखों महिला जनप्रतिनिधि गांवों की सरकार चला रही हैं तो उसके पीछे उस समय शुरू हुई राजनीतिक सोच की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी राजीव गांधी ने बड़े बदलावों की शुरुआत की। नई शिक्षा नीति के जरिए आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा पर जोर दिया गया। ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनी जाती है।

नवोदय विद्यालयों की अवधारणा केवल स्कूल खोलने की योजना नहीं थी, बल्कि गांवों के मेधावी बच्चों को शहरों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास था। सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लाखों छात्र इन विद्यालयों से पढ़कर प्रशासन, विज्ञान, सेना, चिकित्सा और तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़े।

राजीव गांधी ने शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं माना। वे चाहते थे कि भारतीय युवा विज्ञान, तकनीक और आधुनिक सोच से जुड़ें। यही कारण था कि उनके दौर में कंप्यूटर शिक्षा, दूरसंचार और विज्ञान आधारित विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता मिली।

उनकी राजनीति में युवा भारत की झलक दिखाई देती थी। वे अक्सर कहते थे कि भारत की असली ताकत उसके युवा हैं। शायद इसी कारण उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में तेजी, पारदर्शिता और तकनीक आधारित सुधारों पर जोर दिया। हालांकि उनका राजनीतिक जीवन विवादों और चुनौतियों से भी अछूता नहीं रहा, लेकिन आधुनिक भारत की परिकल्पना को लेकर उनकी भूमिका आज भी चर्चा का विषय है। सूचना तकनीक, दूरसंचार, शिक्षा सुधार और स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में उनके कदमों ने भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दी।

21 मई को जब देश राजीव गांधी को याद करता है, तो केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री को नहीं, बल्कि उस सोच को भी याद करता है जिसने भारत को भविष्य की ओर देखने का साहस दिया। आधुनिक भारत के निर्माण की कहानी में उनका नाम एक ऐसे नेता के रूप में दर्ज है जिसने बदलते समय की आहट सबसे पहले सुनी थी।

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