गुजरात में तेज़ होते सियासी पारे और पार्टी में चल रहे उथल पुथल के बीच कांग्रेस पार्टी के नेता और वायनाड सांसद राहुल गाँधी कल यानि 10 मई को दादोह में पार्टी का चुनाव अभियान शुरू करेंगे। इस मौके पर उनकी नज़रें उस आदिवासी वोट बैंक पर होंगी जिनके लिए 27 सीटें आरक्षित हैं। ‘आदिवासी सत्याग्रह रैली’ के बहाने राहुल 14 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी वाले आदिवासी समुदाय को साधने का प्रयास करेंगे।
बता दें कि पिछले विधान सभा चुनाव में इन 27 सीटों में कांग्रेस पार्टी को 15 विधायक मिले थे जबकि सत्ताधारी भाजपा को 9 सीटें। कांग्रेस पार्टी का यह परंपरागत वोट बैंक है और इस वोट बैंक पर भाजपा के अलावा आम आदमी पार्टी की भी नज़र है. प्रधानमंत्री मोदी और केजरीवाल दोनों ही आदिवासियों पर अपने गुजरात दौरे के दौरान डोरे डाल चुके है।
इसके अलावा राहुल इस रैली के बाद पार्टी के विधायकों के साथ मीटिंग भी करेंगे। यह मीटिंग इसलिए और भी महत्वपूर्ण है कि अभी हाल ही में कांग्रेस के विधायक और आदिवासी नेता अश्विन कोतवाल हाथ का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम चुके हैं। खबर यह भी है कि कुछ और विधायक कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा देकर विकल्प तलाश सकते हैं। विधायकों के साथ इस बैठक का मकसद शायद उनका हौसला बढ़ाना और भगदड़ को रोकना है।
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अगर हम कांग्रेस छोड़ने वाले विधायकों की बात करें तो कोतवाल के बाहर जाने से यह संख्या मौजूदा और पूर्व मिलाकर अब 13 पहुँच चुकी है। हालाँकि चुनावी मौसम में विधायकों का आना जाना एक आम बात है लेकिन कांग्रेस के लिए यह बात एकतरफा होकर उसकी चिंता को और बढ़ाती हैं। बहरहाल देखना है कि कल दादोह में राहुल की गर्जना में क्या निकलकर सामने आता है।

