प्रधानमंत्री मोदी के लिए मुसीबत बनते राहुल

आर्टिकल/इंटरव्यूप्रधानमंत्री मोदी के लिए मुसीबत बनते राहुल

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अमित बिश्नोई
राहुल गाँधी इस समय जो दौरे कर रहे हैं उन्हें सामान्य दौरे नहीं माना जा रहा है. ख़ास बात तो ये है कि राहुल गाँधी के दौरों को प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों से ज़्यादा चर्चा मिल रही है और इसकी जो बड़ी वजह ये है कि बतौर नेता विपक्ष लोकसभा में जो राहुल गाँधी का जो पहला भाषण रहा जिसमें उन्होंने न केवल भाजपा, केंद्र की NDA सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस, इन सभी को जिस तरह टारगेट किया और सदन में जिस तरह के सवाल उठाये और सरकार उन सवालों पर जिस तरह विचलित नज़र आयी और प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह खीजते और नाराज़ होते नज़र आये उस सबको देखकर राहुल गाँधी का अब हर दौरा बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहा है.

सदन में सरकार और प्रधानमंत्री को घेरने के बाद राहुल गाँधी ने हाथरस जाकर भगदड़ में मरने वाले परिजनों के साथ मुलाक़ात की, इसके फ़ौरन बाद राहुल गाँधी गुजरात पहुँच गए और वहां पर कुछ समय पहले मोरबी पुल हादसे और गेमिंग ज़ोन अग्निकांड में मरने वालों के परिवारों से मिलकर उनके दुःख में शरीक हुए और आज वो असम और मणिपुर पहुँच गए. असम में जहाँ उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की वहीँ शरणार्थी कैम्पों में जाकर मणिपुर के लोगों का हालचाल जाना। इन सभी दौरों को भले ही कांग्रेस पार्टी अराजनीतिक कहे लेकिन भाजपा और मोदी सरकार के लिए राहुल गाँधी के ये दौर पूरी तरह से राजनीतिक ही हैं. मणिपुर का राहुल गाँधी का ये तीसरा दौरा है और बतौर नेता विपक्ष ये नार्थ ईस्ट का उनका पहला दौरा है. नार्थ ईस्ट का ये दौरा इस लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जिस तरह से लोकसभा चुनाव में उसका असर दिखा उसके हिसाब से भी राहुल का ये दौरा बहुत अहम् हो जाता है.

राहुल गाँधी के ये दौरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहे हैं क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी न तो लोगों के बीच जाना चाहते हैं और न ही किसी समस्या वाले मामले में कभी किसी से मुलाकात या बात नहीं करते, वो लखीमपुर मामले में चुप रहे जहाँ चार किसानों को इनके मंत्री के बेटे ने कुचल दिया, वो किसानों के मामले भी चुप रहे जबकि सौ से ज़्यादा किसानों की उस आंदोलन में मौत हो गयी, मणिपुर पिछले डेढ़ साल से जल रहा है, वहां क्या क्या हुआ और क्या क्या हो रहा, पूरा देश जनता है लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री मोदी वहां नहीं गए, ठीक उनकी नाक के नीचे देश कि महिला पहलवानों के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ उसपर चुप्पी साढ़े रहे और अभी हाथरस के ताज़ा मामले में भी उन्होंने वहां जाना बेहतर नहीं समझा। तो इस तरह की जितनी भी घटनाएं होती है उनमें पीड़ित या पीड़ित परिवारों के साथ प्रधानमंत्री मोदी जी मुलाकात नहीं करते। उन्होंने महिला पहलवानो से तब मुलाकात की जब वो मैडल लेकर लौटीं लेकिन जब वो विक्टिम बनकर उनसे मिलने की कोशिश करती रही, उन्हें प्रधानमंत्री जी ने समय नहीं दिया। आज टीम इंडिया विश्व चैम्पियन बनकर देश लौटी तो सबसे पहले मिलने वालों में प्रधानमंत्री मोदी जी थे लेकिन कल को इनमें कोई किसी बात में पीड़ित हो जाय तो शायद उनके पास इनसे मुलाकात के लिए समय नहीं निकलेगा।

वहीँ इसके उलट राहुल गाँधी इस तरह की घटनाओं में सभी पीड़ितों और उनके परिवारों से मिलने फ़ौरन पहुँच जाते हैं, सिर्फ यही नहीं वो छात्रों के बीच पहुंचकर उनकी परेशनियों में उनके साथ खड़े होते है , वो कारखानों में जाकर कारीगरों की स्थिति के बारे में जानने की कोशिश करते हैं, वो डेली मज़दूरों के बीच जाकर उनके साथ उनके काम के अनुभव को बांटते हैं, इसमें भारत जोड़ो यात्रा और न्याय यात्रा एक अलग ही अनुभव है जिसके दौरान देश के एक कोने से दूसरे कोने तक आम आदमी से मुलाकात कर उनकी परेशानियों को जानने की कोशिश करना अलग ही है। राहुल गाँधी का लोगों से यही मिलना जुलना उनके चर्चा में आने की एक बड़ी वजह है. आज राहुल गाँधी कुछ भी कर रहे हैं उसे दिखाने के लिए मेनस्ट्रीम मीडिया भी मजबूर है. वो राहुल से जुड़ी घटनाओं को, उनके दौरों की कवरेज करने लगा है, राहुल गाँधी को गोदी मीडिया की स्क्रीन पर कवरेज मिलने लगी है, भले ही कम मिल रही हो लेकिन मिलने तो लगी है. अगर प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल को देखा जाय तो वो हर दिन चर्चा में बने रहने के लिए कुछ न कुछ करते रहे हैं, कुछ उसी तरह का पैटर्न राहुल गाँधी ने भी अब अपना लिया है और अब वो रोज़ ही कुछ ऐसा कर रहे हैं जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है. प्रधानमंत्री मोदी के लिए राहुल गाँधी का चर्चा में इस तरह बने रहना उनके लिए खतरे की बड़ी घंटी है। प्रधानमंत्री मोदी भी जानते हैं कि राहुल गाँधी को रोकना आसान काम नहीं, राहुल पर अभी तक उन्होंने जो हथकंडे अपनाये वो असफल साबित हुए, चाहे संसद की सदस्यता छीनना हो, दो साल की सजा की बात हो, घर से बेदखल करना हो, ED द्वारा कई दिनों तक पूछताछ करना हो, हर हथियार राहुल गाँधी के आगे अबतक फेल होता आया है. राहुल गाँधी यहीं पर रुकने वाले नहीं है, गुजरात जाकर उन्होंने जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी को चैलेन्ज दिया है उससे तो यही लगता है कि पीएम मोदी के खिलाफ वो और आक्रमक होंगे। अब देखने वाली बात ये है कि मोदी जी राहुल की आक्रमकता को कहाँ तक और कब तक बर्दाश्त करेंगे क्योंकि इस तरह हमले सहने की उनकी आदत नहीं है. देखना होगा कि इन दोनों के बीच की राजनीतिक जंग किस मोड़ तक पहुँचती है.

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