देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भी सरकार विपक्ष के सवालो पर असहज दिखाई दी। दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्ष ने समाज कल्याण, परिवहन और परिसम्पत्ति को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष के सवालो पर सरकार की ऒर से आये जवाब पर विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखाई दिया. कई सवालों पर सरकार के मंत्री अपने ही जवाबो में फंसते हुए दिखे. संसदीय कार्य मंत्री भी परिसम्पत्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर विपक्ष को आंकड़े पेश नहीं कर पाये। आलम यह रहा की सवाल के जवाब देने मेफँसे मंत्रियों के लिए विभागीय अधिकारीयों की पर्ची खेवनहार बनती हुई दिखाई दी।
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सवालों के जवाब तलाशते मंत्री
बजट सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही विपक्ष ने एक बार फिर अपने तेवर दिखाते हुए प्रश्नकाल में सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। सवाल भी ऐसे की सरकार के मंत्री खुद असहज दिखाई दिए। बुधवार को सदन में समाज कल्याण, परिवहन और परिसम्पत्ति को लेकर सवाल लगे हुए थे। प्रश्नकाल की शुरुवात परिवहन विभाग के सवाल से हुई जिसमे प्रीतम सिंह ने परिवहन मंत्री से निगम को अब तक राजष्व की जानकरी चाही जिसपर परिवहन मंत्री चंदन रामदास ने सदन को जानकारी दी कि 2003 से लेकर अब तक पिचानब्बे करोड़ बारह लाख के राजस्व प्राप्त हुआ। हालंकि वे सीएनजी को लेकर पूछे गए आय व्यय का संतुष्ठ जवाब नहीं दे पाए। जिसपर सदन में मंत्री भी असहज दिखे।
सरकार के पास नहीं आंकड़े
परिसम्पत्ति को लेकर सदन में प्रीतम सिंह के सवाल पर संसदीय मंत्री विपक्ष को संतुष्ट नहीं कर पाय। दरअसल प्रीतम सिंह ने सरकार से राज्य गठन से लेकर अब तक हर पांच साल में संपत्ति बॅटवारे के आँकड़े जानने चाहे। जिस पर संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भाजपा कार्यकाल में हुई दो मुख्यमंत्री स्तर की बैठक का ही जिक्र करते हुए नजर आये।
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पर्चियों ने बचाई मंत्रियों की लाज
प्रश्नकाल मे फँसे मंत्रियों के लिए विभागीय अधिकारीयों की पर्ची खेवनहार बनती हुई दिखाई दी। दरअसल जब प्रीतम सिंह के सवाल पर परिवहन मंत्री विपक्ष को संतुष्ट नहीं कर पाय तो विभागीय अधिकारीयों की पर्ची से मंत्री जी जवाब दे पाऐ। अधिकारीयों की पर्ची देख प्रीतम सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि पर्ची आ गई है अब तो मंत्री जी ज़बाब दे ही देंगे। जिसके बाद सदन में सभी लोग हंस पड़े. ऐसा सदन में एक बार नहीं दो बार हुआ।

