- सदर कोतवाली में पुलिस हिरासत में रखे गए युवक की हो गई थी मौत
लखनऊ। कासगंज में पुलिस हिरासत के दौरान एक युवक की संदिग्ध मौत को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार एक बार फिर कटघरे में खड़ी हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में आज कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी कासगंज जाएगी और पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना देंगी। प्रियंका के कासगंज दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा हो गई है। क्योंकि प्रियंका गांधी जब भी किसी दौरे पर निकलती हैं तभी उन्हें रोकने का प्रयास किया जाता है और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कदम और आगे बढ़ जाते हैं।
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कासगंज कोतवाली क्षेत्र के अहरौली गांव में रहने वाले युवक अल्ताफ को पुलिस ने एक लड़की के अपहरण के मामले में उठाया था। 8 नवंबर को पुलिस हिरासत में लिया गया अल्ताफ 9 नवंबर की शाम को संदिग्ध हालत में मृत पाया गया। पुलिस का कहना था कि अल्ताफ ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। जबकि अल्ताफ के पिता चाहत ने कासगंज पुलिस पर बेटे को फांसी देकर हत्या करने का आरोप लगाया था। इस संबंध में कोतवाल समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर मामले की जांच की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में हलचल पैदा कर देने वाले इस प्रकरण ने विपक्षी दलों को योगी सरकार पर निशाना साधने का एक और मौका दे दिया है। उत्तर प्रदेश में लगातार जनसमर्थन बढ़ा रही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने आज लखनऊ का दौरा रद्द कर कासगंज जाने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही प्रियंका गांधी सोनभद्र के उम्भा नरसंहार, हाथरस कांड, आगरा प्रकरण और लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद पीड़ित परिवारों से मिल चुकी हैं। प्रियंका के दौरे योगी सरकार को परेशानी में डालते हैं इसलिए उन्हें रोकने का भी हर संभव प्रयास किया जाता है। मगर योगी सरकार का यह दांव उल्टा पड़ता है और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को मिलने वाला जनसमर्थन बढ़ जाता है। इस बात को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस और भाजपा में मिलीभगत होने का आरोप भी लगा चुके हैं।
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अब देखना होगा कि कासगंज आ रही प्रियंका गांधी को योगी सरकार रोकने का प्रयास करती है या प्रियंका गांधी पीड़ित परिवार से मिलकर योगी सरकार पर किस प्रकार हमलावर होती हैं। लेकिन यह तय है कि पिछले कुछ समय से पुलिस कार्रवाई के दौरान होने वाली मौतों को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर आयी योगी सरकार के लिये यह मुश्किल भरा दौर है।

