कभी कौड़ियों के दाम पर बिकने वाली अयोध्या शहर की ज़मीन आज सोना उगल रही है. जिस दिन से राम लला के आगमन की पहली खबर आयी उसी दिन से अयोध्या की ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी और लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री में बूम आना शुरू हो गया, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही इसकी शुरुआत हो चुकी थी और जब राम मंदिर की आधारशिला रखी गयी तो ज़मीनों के दाम दिन दूने की रफ़्तार से बढ़ने लगे. जैसे जैसे राम मंदिर का काम आगे बढ़ा अयोध्या में होटल कारोबारियों की संख्या भी बढ़ने लगी, बिल्डर्स भी बढ़ने लगे. सरकार ने भी ज़मीन एक्वायर की और राम मंदिर के लिए बने ट्रस्ट ने भी मंदिर के आसपास की सारी ज़मीनों को खरीदना शुरू कर दिया।
इस बीच ट्रस्ट पर ज़मीन खरीद को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे विशेषकर ट्रस्ट के मुखिया चम्पत राय के खिलाफ, लेकिन राम मंदिर से जुड़ा मामला होने की वजह से भ्रष्टाचार के आरोप भी जल्द ही शांत हो गए. आज हालत ये है कि लोग मुंह माँगा पैसा लिए हुए बैठे हैं लेकिन उन्हें ज़मीनें नहीं मिल रही है. सभी को मालूम है कि आने वाले दिनों में अयोध्या में सिर्फ दर्शनार्थियों की बरसात ही नहीं होगी बल्कि उनके आने से पैसों की भी बरसात होगी। आज देश के बहुत से लोग अयोध्या में अपना दूसरा घर बनाना चाहते हैं ताकि लॉजिस्टिक मुहैया करके पैसा भी कमा सकें और राम लला के दर्शनों का लाभ भी बराबर मिलता रहे.
आज की अयोध्या और दस बरस की अयोध्या में ज़मीन आसमान का अंतर है और ये अंतर ज़मीनों के दामों में भी नज़र आता है. आज आपको एक नयी अयोध्या नज़र आती है, ऐसा लगता हैं कोई नया आध्यात्मिक शहर बसाया गया है. रियल स्टेट ब्रोकर्स की पहली पसंद बन गया है अयोध्या। लोग यहाँ प्रॉपर्टी में निवेश करना चाहते हैं. 2019 में राम मंदिर पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से ही अयोध्या में प्रॉपर्टी के दाम 25 से 30% बढ़ गए थे। उस समय अयोध्या के बाहरी इलाके में ज़मीनों की कीमत 400 रुपये से 700 रुपये वर्ग फीट थी। जबकि अयोध्या शहर के अन्दर यह रेट 1000 रुपये वर्ग फीट से लेकर 2000 रुपये वर्ग फीट था। लेकिन आज की तारीख़ में अयोध्या के बाहरी इलाकों में जमीन का रेट 1500 से 3000 रुपये प्रति वर्ग फीट हो चुका है। जबकि शहर के अंदर मुंह मांगी कीमत चल रही है.

