पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र के गांवों का हाल बेहाल, ग्रामीण बोले,’रोड नहीं तो वोट नहीं’

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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र के गांवों का हाल बेहाल, ग्रामीण बोले,’रोड नहीं तो वोट नहीं’

वाराणसी। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी (PM Narendra Modi) सहित पूरी भाजपा और उसकी बी टीम माना जाने वाले संघ और विहिप पूर्वाचल की जीत के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में ही ग्रामीण चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार को लेकर धरना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पिछले पांच साल में किसी प्रकार का विकास नहीं हुआ है। गांव तक आने के लिए टूटी सड़कों से गुजरना पड़ता है। जिसमें गिकर कई बार लोग चोटिल हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विधायक और सांसद से लेकर मंत्री,प्रधानमंत्री कार्यालय तक सड़क बनवाने के लिए गुहार लगाई है। लेकिन सड़क् बनना तो दूर किसी ने इधर आकर भी ग्रामीणों का हाल नहीं पूछा। मामला है वाराणसी (Varanasi) जिले के पिंडरा विधानसभा के गांव पिंडराई का। जहां पर ग्रामीणों ने इस बार मतदान के बहिष्कार का ऐलान किया है। ग्रामीण गांव के बाहर रोड नहीं तो वोट नहीं के बैनर लेकर धरने पर बैठे हैं।

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ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से उनके गांव की सड़क अभी तक नहीं बनी है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर वाराणसी की हकीकत जाननी है और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र का विकास कार्य देखना है तो उनके गांव में चले आइए। वाराणसी के गांव में विकास की पूरी हकीकत ही खुलकर सामने आ जाएगी। वहीं पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में ग्रामीणों द्वारा मतदान के बहिष्कार की सूचना से प्रशासन के हाथपांव फूल गए हैं। ग्रामीणों को मनाने के लिए और धरना समाप्त करवाने के लिए अधिकारी गांव में पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनको दो टूक सुना दी। ग्रामीणों का कहना था कि वे हर जगह गुहार लगा चुके हैं। कोई सुनवाई नहीं हुई। लेकिन अब गुस्साए ग्रामीणों ने मन बना लिया है कि जब तक रोड नहीं बनेगी तब तक वे वोट भी डालेगे। आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार करते हुए मुख्य मार्ग पर एक बैनर लगा दिया है। वहीं गांव के मुख्य मार्ग पर ही धरना प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे हैं। गांव के रहने वाले सुनहरी ने बताया कि गांव में सड़क के न होने से बच्चों की शादी के लिए भी कोई नहीं आता हे। दुल्हा और दूल्हन की गाडी घर के दरवाजे तक नहीं पहुंच पाती। और तो और बुजुर्ग और बीमार को मुख्य सड़क तक चारपाई पर रखकर लाना होता है।

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