भतीजे अखिलेश और चाचा शिवपाल के बीच अनबन कोई नई बात नहीं लेकिन उसी अनबन के बीच जब नेता विरोधी दल अखिलेश यादव ने जब यूपी विधानसभा के स्पीकर को चिट्ठी लिखकर चाचा शिवपाल के लिए आगे की सीट अलॉट करने की मांग की तो लोगों को हैरानी ज़रूर हुई और सियासी गलियारों में खुसपुस भी शुरू हो गयी कि क्या चाचा और भतीजे के बीच अभी समझता होने की कोई गुंजाईश है. लेकिन अब जानकारी मिली है कि अखिलेश की इस मांग को ठुकरा दिया गया है. शिवपाल यादव को एक विधायक के रूप में पिछले सीट पर ही बैठना पड़ेगा.
बता दें कि प्रस्पा के राष्ट्रिय अध्यक्ष होने के बावजूद शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के विधायक हैं क्योंकि उन्होंने साइकिल चुनाव निशान पर इलेक्शन लड़ा था. हालाँकि अखिलेश से विवाद के बाद शिवपाल ने उन्हें विधानसभा में अलग दल के नेता के रूप स्वीकार करने की अपील की थी और कहा था कि उन्हें समाजवादी पार्टी के विधायकों से अलग जगह दी जाय. वहीँ यह भी जानकारी मिली है कि समाजवादी पार्टी के पास अग्रिम पंक्ति की अब पांच सीटें हो गयी हैं. इससे पहले चार सीटें थीं जिनपर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, आज़म खान, अवधेश प्रसाद और लालजी वर्मा बैठते हैं. बता दें कि पूर्व स्पीकर माताप्रसाद पांडेय और ओम प्रकाश सिंह को दूसरी पंक्ति में जगह मिली है, अब इनमें से कोई एक नई अलॉट हुई पांचवीं सीट पर बैठेगा।
बता दें कि नेता विरोधी दल अखिलेश यादव ने विधानसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि सदन के वरिष्ठ सदस्य होने के नाते शिवपाल सिंह यादव को आगे की सीट दी जाए. लेकिन इसमें तकनीकी पेंच था जिसके कारण अखिलेश यादव की यह मांग नहीं मानी गयी. हालाँकि अखिलेश अगर चाहें तो वो माता प्रसाद पांडेय और ओम प्रकाश सिंह को दूसरी पंक्ति में ही बिठाकर चाचा शिवपाल को नयी मिली पांचवीं सीट पर बिठा सकते हैं.

