Mandir-Masjid Row: मंदिर मस्जिद मसले के बीच गरमा रही मुस्लिम सियासत,20 प्रतिशत वोट बैंक पर अखिलेश की निगाहें

पॉलिटिक्सMandir-Masjid Row: मंदिर मस्जिद मसले के बीच गरमा रही मुस्लिम सियासत,20 प्रतिशत...

Date:

मेरठ। इस समय ज्ञानवापी से लेकर मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद मामले में प्रदेश से लेकर देश तक की सियासत गरम है। इस मसले पर इस समय दोनों ही पक्ष यानी हिंदू से लेकर मुस्लिम संगठन तक सक्रिय हैं। मुस्लिम संगठन जहां दिल्ली से लेकर देवबंद और लखनऊ तक बैठक कर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। वहीं दूसरा पक्ष भी आगामी रणनीति बनाकर मसले को गरम कर रहा है। इस समय देश और प्रदेश के हालत 90 दशक जैसे बन रहे है। लेकिन इन्हीं सब के बीच प्रदेश में मुस्लिम सियासत भी करवट ले रही है। दलों में बिखरा मुस्लिम वोट बैंक अब एकजुट होने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो आगामी आम चुनाव में प्रदेश में ये मुस्लिम वोट बैंक एकजुट होकर जिस पार्टी की तरफ गया उसकी प्रदेश में बल्ले—बल्ले हो जाएगी। यह बात अब अखिलेश यादव समझ गए हैं और मौके पर नजाकत तो भांपते हुए अब वो मुस्लिम पक्ष की ओर काफी मजबूती के साथ खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं। जेल में बंद आजम खान से मिलने में परहेज करने वाले अखिलेेश यादव ने अस्पताल में भर्ती हुए आजम खान से इन्हीं मुस्लिम वोटों के कारण उनसे मुलाकात की। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अब बखूबी समझ गए हैं।

इसी कारण से वो इन दिनों मुस्लिम वोटों को लेकर सतर्क हैं। दूसरे विपक्षी दलों की नजर इस 20 प्रतिशत वोट बैंक पर है। यहीं कारण है कि पिछले एक सप्ताह में अखिलेश यादव ने सियासी कदम को साधते हुए रखे और वे अब काफी एक्टिव हो गए हैं। पूर्वमंत्री कपिल सिब्बल,जावेद अली खान को राज्यसभा भेजना, प्रदेश का बड़ा मुस्लिम चेहरा आजम खान की नाराजगी दूर करने की कवायद यह सब मुस्लिम वोटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की सपा अध्यक्ष की रणनीति का हिस्सा है। वहीं सपा अल्पसंख्यक सम्मेलन में अखिलेश ने मुसलमानों को भाजपा के नैरेटिव में नहीं फंसने की हिदायत भी दी है। अखिलेश के इस राजनीति पैतरे को एक तरह से 2024 के आम चुनाव में मुस्लिम वोटों को लेकर सक्रिय होना ही माना जा रहा है। बता दें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के पक्ष में मुस्लिम मतदान होने पर अखिलेश ने अल्पसंख्यक समुदाय का धन्यवाद किया था। 

Read also: चारधाम तीर्थयात्रा : अव्यवस्था को लेकर होटल एसोसिएश की गंगोत्री राजमार्ग पर जाम की चेतावनी

अखिलेश मुस्लिमों के बीच यह संदेश प्रसारित करने में कामयाब हो चुके हैं कि भाजपा नफरत फैलाने के अलावा समाज को बांटने के एजेंडे पर काम कर रही है। महत्वपूर्ण पदों पर आरएसएस नेताओं को बैठाया जा रहा है। हाल के दिनों में दिल्ली,देवबंद और लखनऊ तक मुस्लिम संगठन बैठक कर देश के हालातों पर चर्चा कर चुके हैं। यह माना जा रहा है कि इस समय हालत 90 के दशक जैसे हो चुके हैं। अखिलेश यादव जिस तरह से दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती आजम खान से मिले और वहां पर करीब तीन घंटे बिताए। इससे सपा अध्यक्ष ने जहां आजम की नाराजगी दूर करने की कोशिश की वहीं राज्यसभा चुनाव के जरिए अखिलेश ने 2024 के आम चुनाव के सियासी समीकरण साधे। अखिलेश ने जावेद अली खान को सपा से राज्यसभा भेजकर मुस्लिम वोटों को साधने की कवायद की। बता दें कि प्रदेश में करीब 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। ये 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों पर अपना खास असर रखते हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटों की सियासी ताकत को पहचानकर अब सपा उन्हें नजर अंदाज करने की स्थिति में नहीं है।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related