बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में रामपुर की सीट से उम्मीदवार नहीं उतरने का फैसला किया है. हालाँकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा इस पर अपना उम्मीदवार ज़रूर उतारेगी। पार्टी का मानना है कि पहले जहाँ पर बसपा मज़बूत है उसे वहां पर ध्यान देने की ज़रुरत है. इस बात का फैसला यूपी यूनिट की दो दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद पार्टी प्रमुख मायावती की ओर से किया गया.
बसपा ने आजमगढ़ सीट से अपना उम्मीदवार पहले ही घोषित कर रखा है, पार्टी का मानना है आज़मगढ़ में बसपा काफी मज़बूत है इसलिए उस सीट पर उसे ज़्यादा ध्यान देना चाहिए। पार्टी ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस पार्टी को उखाड़ फेंकने वाली बसपा में ही यह दम है कि पूंजीपतियों के समर्थन वाली भाजपा की जड़ों को हिला सके. मायावती ने कहा कि बसपा सीमित संसाधनों वाली पार्टी है जिसका मुकाबला धनबल पर चलने वाली विरोधी पार्टियों और उनके हथकण्डों से लगातार होता रहता है। इसीलिए पार्टी को फ़िज़ूलख़र्ची वाली बैठकों से दूर रहकर कैडर बैठकों के दम पर पार्टी को मजबूत बनाना होगा।
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दरअसल विधानसभा चुनावों में सूपड़ा साफ़ होने के बाद मायावती पार्टी के भविष्य के लिए बेचैन हो गयी हैं, यह दो दिवसीय बैठक उसी का नतीजा है , बैठक में संगठन को मज़बूत बनाने के उपायों पर गौर किया गया. बात भले ही 2024 के लोकसभा चुनावों की की जा रही हो लेकिन सारी रणनीति 2027 को लेकर तैयार की जा रही है, बसपा के लिए लोकसभा चुनाव उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना विधानसभा का चुनाव। मायावती की राजनीती की धुरी यूपी ही है, खुद के लिए हो या फिर वारिस यानि भतीजे के लिए हो.

