झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरने की कोशिशें लगातार जारी हैं, उनकी अयोग्यता के मामले के बाद अब चुनाव आयोग ने उनके भाई बसंत सोरेन को भी विधायक के रूप अयोग्य घोषित कर दिया है और राज्यपाल को अपनी राय भी भेज दी है, चुनाव आयोग ऐसा ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए भी कर चुकी है और उसके बाद झारखण्ड में ऑपरेशन लोटस से बचने के लिए यूपीए विधायकों को एक जगह से दूसरी जगह छुपाने का खेल चला और बाद में हेमंत सोरेन सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पेश किया और उसे जीतकर थोड़ी चैन की सांस ली.
बता दें कि चुनाव आयोग ने अयोग्यता की यह कार्रवाई भाजपा की शिकायत पर की है जिसमें सोरेन बंधुओं पर पद पर रहते हुए खुद के लिए खनन पट्टे का विस्तार कराके चुनाव नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. भाजपा ने बसंत सोरेन के खिलाफ धारा (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9 ए) के तहत कार्रवाई की मांग की थी. भाजपा का आरोप था कि हेमंत और बसंत सोरेन ने खनन फर्म के सह-मालिक होने बावजूद चुनावी हलफनामे में इसका खुलासा नहीं किया। राज्यपाल अयोग्यता के इस मामले पर अभी तक खामोश हैं.
जानकारी के मुताबिक हेमंत सोरेन पिछले सप्ताह सदन में भले ही बहुमत का परीक्षण जीता हो लेकिन अगर उन्हें विधायक के रूप में अयोग्य घोषित किया जाता है तो उन्हें झारखंड का मुख्यमंत्री पद छोड़ना होगा. JMM पहले ही झारखण्ड में भाजपा पर ऑपरेशन लोटस चलाने का आरोप लगा चुकी है, चुनाव आयोग की इन सिफारिशों के बाद उसे डर है कि भाजपा इस राजनीतिक संकट का लाभ उठा सकती है और उनके विधायकों की खरीद फरोख्त कर कर्णाटक और महाराष्ट्र की तरह हेमंत सरकार को गिराने का काम कर सकती है.

