Gujarati Chunavi Dangal-कांग्रेस पार्टी की भी क्या हालत हो गयी है, जब भी कुछ अच्छा करने चलती है कुछ न कुछ अड़ंगेबाज़ी पार्टी के अंदर से ही होने लगती हैं, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर अभी कांग्रेस की कोई घोषणा नहीं हुई वहीँ गुजरात कांग्रेस में पाटीदार नेताओं को लेकर बहसबाज़ी शुरू हो गयी है। कांग्रेस पार्टी गुजरात में भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए जहाँ नरेश पटेल को लेकर नए समीकरण बनाना चाहती है वहीँ कांग्रेस के थोड़े पुराने पाटीदार नेता हार्दिक को कांग्रेस पार्टी में दूसरा पाटीदार नेता मंज़ूर नहीं।
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इधर नरेश पटेल के सोनिया गाँधी से मुलाकात करने की खबरें आ रही हैं तो वहीँ हार्दिक पटेल बग़ावत का बिगुल फूंके हुए हैं. बिलकुल वैसे ही जैसे एक म्यान में एक ही तलवार रह सकती है. कांग्रेस पार्टी इस समय बड़ी दुविधा की स्थिति में है, किस पटेल को पकड़े और किसे छोड़े। चाहती तो है कि दोनों ही साथ रहें लेकिन ऐसा होता दिखता नहीं। नरेश पटेल को गुजरात की राजनीति का एक उभरता हुआ सितारा कहा जा रहा है, प्रशांत किशोर ने भी उन्हीं के इर्द गिर्द गुजरात के लिए अपनी योजना का खाका तैयार किया है.
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दरअसल नरेश पटेल की ओर कांग्रेस का झुकाव गुजरात के पाटीदार समुदाय के वर्चस्व को लेकर है, एक रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में दो तरह के पाटीदार समुदाय हैं, एक लेउवा पाटीदार दुसरे कडुआ पाटीदार। लेउआ पाटीदार की संख्या लगभग 60 प्रतिशत है और इसी समुदाय से नरेश पटेल भी आते हैं, नरेश पटेल के पक्ष में एक बात और भी जाती है, वह है लेउवा पाटीदार समुदाय की कुलदेवी ट्रस्ट का ट्रस्टी होना और इस ट्रस्ट से जो फरमान जारी होता है उसे पाटीदारों के दोनों समुदाय मानते हैं. यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी हार्दिक को साइड करके नरेश पटेल पर दांव लगाना चाह रही है, हार्दिक भी इस समीकरण को अच्छी तरह से जानते हैं, इसलिए वह प्रेशर गेम खेल रहे हैं, हालाँकि लगता नहीं कि उनका यह प्रेशर गेम काम करेगा। फ़िलहाल तो दो पटेलों के बीच गुजरात कांग्रेस पार्टी पिस रही है।

