Gujarati Chunavi Dangal- पांच राज्यों के चुनावों में करारी शिकस्त के बाद भी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने कोई सबक नहीं सीखा है। फैसलों को लटकाने का सिलसिला जारी है, फिर वह चाहे प्रशांत किशोर को लेकर हो या फिर नरेश पटेल को लेकर। इधर गुजरात में धीरे धीरे कांग्रेसी कुनबा बिखरने लगा है। हालाँकि अभी हाल के दिनों में कोई मौजूदा विधायक ने तो पाला नहीं बदला है लेकिन कुछ पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने नया ठिकाना तलाशना शुरू कर दिया है, इसमें ज़्यादातर AAP का दामन पकड़ रहे हैं और कुछ सत्तारूढ़ भाजपा में भविष्य तलाश रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी अभी मंत्रणाओं के दौर में चल रही है।
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कांग्रेस के टालू रवैये को देखते हुए पार्टी नेताओं में बेचैनी बढ़ रही है, उन्हें भाजपा का डर पहले से था और अब आम आदमी पार्टी की बढ़ती सरगर्मियों ने और ज़्यादा चिंतित कर दिया है। आज भी कांग्रेस के दो नेताओं ने हाथ का साथ छोड़ दिया, एक ने AAP को अपनाया तो दूसरे को भाजपा में जाना बेहतर लगा। भाजपा के साथ जाने वालों में मणिलाल वाघेला का नाम है, मणिलाल कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक हैं, वहीँ AAP का साथ पकड़ने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ और प्रभावशील नेता कैलाश गढ़वी हैं जो अपने साथ 300 कांग्रेसी कार्यकर्ता भी ले गए।
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फिलहाल कांग्रेस पार्टी में मंथन के नाम जो कुछ चल रहा है उससे गुजरात का आम कांग्रेसी मथा जा रहा है और अनिश्चय की स्थिति की ओर बढ़ता जा रहा है। जिस नरेश पटेल को लेकर कांग्रेस उत्साहित दिख रही है वह भी सौदेबाज़ी की मुद्रा अपनाये हुए हैं, दिल्ली गए सोनिया से मिलने और मिले सिर्फ प्रशांत किशोर से और लौटकर सारे विकल्प खुले होने के बयान दे रहे हैं, मतलब वह आम आदमी पार्टी और भाजपा को अपने भावी योजना से अलग करके नहीं देख रहे हैं, ऐसा वह क्यों कर रहे हैं, क्या कांग्रेस पार्टी से उनकी कोई बार्गेनिंग अभी भी चल रही है, या अभी कुछ बातों पर आला कमान से सहमति नहीं बनी है, उधर प्रशांत किशोर कांग्रेस नेताओं से मीटिंगें करते करते अचानक तेलंगाना में सरकारी मेहमान बन गए हैं. सबकुछ एक रहस्य जैसा है और लोग सिर्फ कयासआराइयाँ कर रहे हैं। सोनिया के मन में क्या चल रहा है यह किसी को नहीं मालूम।

