लखनऊ। प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में भी दुर्दिन झेल रही कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में मिली हार के सदमें से अभी बाहर नहीं निकली है। आने वाले आम चुनाव के लिए खुद को मजबूती से खड़े करने की बजाय पार्टी अब अपने कार्यकर्ताओं को जबरिया रिटायरमेंट देने में लगी है। इसी कड़ी में पार्टी ने उप्र कांग्रेस कमेटी कार्यालय के कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर दिया। इन कर्मचारियों की संख्या पांच है। जिनको जबरन रिटायर किया गया है। पांच नियमित कर्मचारियों को जबरन रिटायर किये जाने से नाराज यूपीसीसी के 40 कर्मचारियों ने यूपीसीसी कार्यालय में धरना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों ने कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अन्याय में हस्तक्षेप करने की मांग की।
यूपीसीसी उपाध्यक्ष व प्रभारी-प्रशासन योगेश दीक्षित ने यूपीसीसी कार्यालय की कंप्यूटर आपरेटर ममता भार्गव, वरिष्ठ लिपिक उमा अग्रवाल, शर्मावती तिवारी के अलावा लिपिक कृष्ण कुमार शुक्ला और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हरि सागर को वर्तमान परिस्थितियों में पार्टी कार्यालय में उनकी सेवाओं जरूरत नहीं होगी ऐसा पत्र जारी किया। इतना ही नहीं कर्मचारियों को एक महीने का एडवांस भुगतान करने और लेखा विभाग से हिसाब किताब करने के लिए कहा गया है। इनके अलावा छह सफाईकर्मियों को काम पर आने से मना कर दिया। सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस कमेटी कर्मचारियों का काम आउटसोर्स करने की तैयारी है।
सोनिया गांधी को पत्र में लिखकर कर्मचारियों ने कहा है कि अल्प वेतनभोगी कर्मचारियों के रूप में उन्होंने जीवन के 35 वर्ष पार्टी सेवा में लग गए। सेवा के अंतिम वर्षों में कांग्रेस की ओर से किया यह कृत्य शोभा नहीं देता। चुनाव में पार्टी ने अरबों रुपये फूंक दिए हैं। कांग्रेस से लाखों रुपये लेकर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने क्या भूमिका निभाई? इन प्रत्याशियों की सजा लाचार कर्मचारियों को दी जा रही है?
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निकाले गए कर्मचारियों ने कहा कि वे 15 हजार रुपये वेतन पा रहे हैं। ऐसे में उनको निकाला जा रहा है। लेकिन इनसे कई गुना अधिक वेतन लेने वाले कर्मचारियों की विभिन्न स्तरों पर नियुक्ति की जा रही हैं। उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की नियमावली के अनुसार सेवामुक्ति का भुगतान की मांग की। निकाली गई महिला कर्मचारियों ने कहा कि कांग्रेस महासचिव और प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी सरकारी कर्मचारियों की छंटनी को लेकर सरकार पर निशाना साध रही हैं। जबकि पार्टी के वेतनभोगी कर्मचारियों को लेकर इतनी असंवेदनशीलता हैं। प्रियंका के नारे ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ की याद भी महिला कर्मचारियों ने दिलाई।

