उम्मीद के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने राहुल गाँधी पर 2014 की हार का ठीकरा फोड़ने के साथ हाथ का साथ छोड़ दिया है, साथ ही भविष्यवाणी भी की है कि पार्टी अब दोबारा खड़ी नहीं हो सकती। कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पांच पन्नों की लम्बी चौड़ी चिट्ठी में उन्होंने आरोप लगाया कि जबसे राहुल गाँधी को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था तभी से पार्टी के बुरे दिन शुरू हो गए थे क्योंकि पार्टी में अनुभव को किनारे कर चाटुकारों को बढ़ावा देने का सिलसिला शुरू हो गया था. बता दें कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस के बागी गुट G-23 के नेतृत्वकर्ता हैं और अभी हाल ही में उन्होंने जम्मू-कश्मीर कांग्रेस की प्रचार समिति के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दिया है.
दरअसल गुलाम नबी आजाद काफी लंबे समय से नाराज चल रहे थे, अपनी नाराज़गी की वजह वैसे तो पार्टी के अंदर बातचीत और मशविरे की प्रक्रिया का ख़त्म होना बताते रहते हैं लेकिन यह सभी जानते हैं कि उनको परेशानी राहुल गाँधी और उनके व्यवहार से थी, जिसका खुलासा उन्होंने अपनी चिट्ठी में किया है. पूरी चिठ्ठी राहुल गांधी पर हमलों से भरी पड़ी है. राहुल को उन्होंने बचकाना व्यवहार वाला बताया और कांग्रेस की ‘खस्ता हालत’ के लिए सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया है. चिठ्ठी में उन्होंने लिखा है कि राहुल के उपाध्यक्ष बनते ही पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को किनारे कर दिया गया और अनुभवहीन चाटुकारों की मंडली पार्टी पर हावी होती चली गयी.
गुलाम नबी आजाद ने अपनी चिठ्ठी में कहा कि नए अध्यक्ष का चुनाव सिर्फ एक खेल है, पार्टी का जो भी नया अध्यक्ष होगा कठपुतली ही होगा. उन्होंने कहा कि दरअसल राहुल गांधी ने पार्टी के अंदर बात रखने की जगह ही नहीं छोड़ी, कोई भी अब पार्टी फोरम पर अपनी बात नहीं कहता। आज़ाद ने अपने पत्र में G 23 नेताओं को अपशब्द कहे जाने और उन्हें अपमानित करने, नीचा दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की वापसी के सारे रास्ते बंद हो चुके है. वहीँ गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे पर कांग्रेस ने कहा कि उनका इस समय पार्टी छोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है.
बता दें कि कांग्रेस के नाराज नेताओं के जी 23 गुट के नेता पार्टी में लगातार बदलाव की मांग करते रहे हैं. इससे पहले कांग्रेस के नेता कपिल सिबब्ल हाथ का साथ छोड़ा और आनंद शर्मा भी कभी भी कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह सकते हैं. उन्होंने हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य इकाई की संचालन समिति के अध्यक्ष पद से रविवार को इस्तीफा दिया था.

