बिहार की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है, पिछले कुछ दिनों की बिहार में हो रही राजनीतिक हलचलों से इस बात के साफ़ संकेत मिल रहे हैं कि सत्तारूढ़ जेडीयू और राजद में सबकुछ ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री नितीश कुमार की बातों से अंदाज़ लगाना मुश्किल है कि उनके मन में क्या चल रहा है और इसीलिए बिहार के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज़ हो चली है कि लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा के भी चुनाव हो सकते हैं और नितीश कुमार एकबार फिर पाला बदल कर भाजपा से हाथ मिला सकते हैं।
कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू होने से पहले तक विपक्षी गठबंधन में सबकुछ ठीक नज़र आ रहा था लेकिन पिछले 10 दिनों में बिहार में बहुत कुछ घट चुका है, भाजपा ने राम मंदिर से फुर्सत पाने के बाद सारा ध्यान बिहार पर लगा दिया है, कहा जा रहा है कि नितीश कुमार से अमित शाह की बातचीत भी हुई है. मोदी सरकार ने जननायक कर्पूरी ठाकुर को मरणोंपरांत भारत रत्न देने का एलान कर दिया है, इसी के साथ नितीश कुमार भी मुखर होकर प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करने लगे हैं और उन्हें कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने के एलान के लिए धन्यवाद कहा है. नितीश ने सिर्फ मोदी को शुक्रिया ही नहीं कहा, केंद्र की पिछली सरकारों को अबतक इस तरह का एलान न करने के लिए कोसा भी है.
बिहार में सीट बंटवारे को लेकर इंडिया अलायन्स में मनमुटाव है। सत्तारूढ़ राजद और जेडीयू बराबर सीट चाहती है। ऐसे में कांग्रेस के लिए सिर्फ 5 सीटें ही बचती हैं जबकि वो दस सीटों की मांग कर रही है। लालू यादव और नीतीश कुमार के रिश्तों में एकबार फिर खटास की बातें सुनाई दे रही है । कर्पूरी ठाकुर को लेकर नीतीश कुमार की पीएम मोदी से नजदीकियां बढ़ती नजर आ रही हैं। भाजपा के तेवर भी नितीश के लिए अब काफी नरम दिख रहे हैं. इन सभी बातों से संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री नितीश कुमार कहीं विधानसभा भांग करने का एलान न कर दें , अगर वो ऐसा करते हैं तो निश्चित ही भाजपा के साथ खड़े दिखाई देंगे।

