सियासत को लहू पीने की लत है, वरना मुल्क में सब ख़ैरियत है

उत्तर प्रदेशसियासत को लहू पीने की लत है, वरना मुल्क में सब ख़ैरियत...

Date:


सियासत को लहू पीने की लत है, वरना मुल्क में सब ख़ैरियत है

मोहम्मद कामरान

सियासत को लहू पीने की लत है, वरना मुल्क में सब ख़ैरियत है
मोहम्मद कामरान

सियासत इस कदर अवाम पे अहसान करती है
आँखे छीन लेती है फिर चश्में दान करती है
श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट में किया दिल से दान लेकिन दिमाग मे सियासत खटक गई,,

सियासत भी कितनी अजीब चीज़ होती है, अपने सियासी फायदे के लिए पिछले तीन दशकों से हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच कट्टरता और दूरियां बढ़ाने का काम इसी सियासत ने किया,

अयोध्या के मंदिर मस्जिद विवाद में आजादी के बाद हमारे समाज में सांप्रदायिक जहर फैलाने में सियासत ने अपने फायदे के लिए एक बड़ा योगदान किया और इस सियासत के चलते देश के उन हिस्सों में भी सांप्रदायिक दंगे हुए जहां विभाजन के दौरान भी नहीं हुए थे। अचानक सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो सभी सियासी दलों, संघ परिवार और मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने खुले दिल से इस फैसले को स्वीकार कर लिया जैसे कुछ हुआ ही ना हो और तो और मुस्लिम नेताओं ने मंदिर निर्माण के लिए दान करने की अपील कर करोड़ों हिंदुस्तानियों का दिल भी जीत लिया।

फिर झगड़ा किस बात पर था ये समझ नही आया, लाखों घर-परिवार बेघर हो गए, सैकड़ों जाने चली गयी, हिन्दू मुसलमान के बीच नफरत की खबरों का भंडार समाचार पत्रों में दिखने लगा और आज इन्हीं समाचार पत्रों में मुस्लिम समुदाय द्वारा श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के लिए दिए जा रहे योगदान को बड़ी बड़ी खबरों के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है। ये कोई नई बात नही है, हम सब भारत देश के नागरिक हमेशा से भाईचारगी, अमनपसन्दगी से रहते आएं है, ईद की खुशियां हो या दीवाली की मिठास एक साथ मिलजुलकर मनाते आए है, बड़ा मंगल हो या रोज़ा अफ्तार भंडारे सजाते आये है फिर कहाँ से हमारे दिलोदिमाग में ये सियासत ज़हर घोल देती है और अपने फायदे नुकसान के लिए हमे इस्तेमाल करती है, इस सियासी चाल में फसकर हम एक दूसरे के लहू के प्यासे हों जाते है जबकि हम जानते है कि सियासत को लहू पीने की लत है, वरना मुल्क में सब ख़ैरियत है,

ये एक विचारनीय प्रश्न है, जो दिमाग मे अटक गया, आप ज़रूर विचार करें।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related