प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता को “धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता” बताते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र की भावना को मजबूत होगी। प्रधानमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब एक दिन पहले ही उत्तराखंड इस कानून को लागू करने वाला पहला राज्य बना है। देहरादून में 38वें राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन करने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि कल उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला राज्य बन गया और मैं इसके लिए उत्तराखंड सरकार को बधाई देता हूं क्योंकि इससे लोकतंत्र और संविधान की भावना मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यूसीसी में खेलों जैसी ही टीम भावना है, किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। विवाह, तलाक और उत्तराधिकार संबंधी कानूनों की जगह समान नागरिक संहिता लागू करना प्रधानमंत्री मोदी और उनकी पार्टी भाजपा का लंबे समय से लक्ष्य रहा है। बता दें कि मुस्लिम नेताओं और आलोचकों का कहना है कि यूसीसी तलाक, विवाह और उत्तराधिकार संबंधी इस्लामी कानूनों को चुनौती देता है। सोमवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि एक राज्य ने समान नागरिक संहिता को वास्तविकता बना दिया है और यह केवल समय की बात है कि “पूरे देश में समान कानून होंगे”।
दिसंबर में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा को बताया कि भाजपा सरकार वाला हर राज्य उत्तराखंड की तरह नागरिक संहिता लागू करेगा। यूसीसी का वादा 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया गया था। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे अन्य भाजपा शासित राज्यों ने अपने स्वयं के नागरिक संहिता लाने की योजना का संकेत दिया है।

