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कांग्रेस का काला जादू और मोदी जी की परेशानी

भारतीय राजनीति की बात ही निराली है, अपने विरोधियों पर हमले के लिए कुछ भी कह सकते हैं, कोई भी तर्क दे सकते हैं. बोलते समय वो यह भी नहीं सोचते कि उनके इन कुतर्कों का प्रभाव क्या पड़ेगा, लोग क्या सोचेंगे, दुनिया का सोचेगी, विशेषकर जब ऐसी बातें देश की सत्ता शिखर पर बैठा सर्वोच्च नेता करे. जी हाँ प्रधानमंत्री मोदी ने एकबार फिर कांग्रेस पार्टी पर काला जादू करने का आरोप लगाया। बड़ा अजीब सा लगता है कि वह शख्स जो ड्रोन युग की बात करता है जो कहता है कि लोगों को पता ही नहीं चलता और उसके ड्रोन उसे उनकी सारी जानकारी उपलब्ध करा देते हैं, वह इंसान आज के आधुनिक युग में काले जादू और झाड़ फूंक की बात कर रहा है. कांग्रेस पार्टी के मंहगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ काले कपड़ों में विरोध प्रदर्शन से 56 इंच का सीना होने का दावा करने वाला व्यक्ति इतना विचलित हो गया कि विरोधी पार्टी पर काला जादू और झाड़ फूंक का आरोप लगाने लगा. 

कांग्रेस पार्टी के काले विरोध प्रदर्शन से भाजपा काफी विचलित है इसका पता तो 5 अगस्त को ही चल गया था जब देश के सत्ता शिखर पर बैठे नंबर दो की हैसियत रखने वाले केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने कांग्रेस के कामयाब विरोध प्रदर्शन को राम जन्मभूमि से जोड़ दिया था और कहा था कांग्रेस का काले कपड़ों में यह प्रदर्शन दरअसल राम मंदिर निर्माण का विरोध है. उससे पहले गाँधी फैमिली पर किसी भी हमले की अगुवा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस पार्टी की काफी आलोचना की थी लेकिन न तो स्मृति ईरानी की बातों में लोगों को दम नज़र आया और न ही अमित शाह का विरोध प्रदर्शन को राम मंदिर से जोड़ने का कुतर्क।

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अब ऐसे में इस विरोध प्रदर्शन को काले जादू और झाड़ फूंक से जोड़ने का शानदार विचार प्रधानमंत्री जी को कहाँ से आया यह भी एक शोध का विषय है, हालाँकि देश में चल रहे भक्तिकाल में भाजपा नेतृत्व की ओर से इस तरह की बातें कोई हैरानी की बात नहीं हैं, मोदी जी के समर्थकों को इस तरह की बातें अच्छी भी लगती हैं. खैर मेरे विचार से मोदी जी के ज़हन में काले जादू और झाड़फूंक का नायाब ख्याल शायद बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद आया. उन्हें लगा कि 5 अगस्त को कांग्रेस पार्टी द्वारा किये गए काले जादू का ही यह असर हुआ कि चार दिन बाद यानि 9 अगस्त को बिहार जैसे राज्य में उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया और इसीलिए 10 अगस्त को कांग्रेस के काले कपड़ों में किये गए विरोध प्रदर्शन के प्रति उनके मन में भरा गुबार फूट पड़ा और उन्होंने देश की सबसे पुरानी पार्टी पर काले जादू की राजनीति का हास्यास्पद आरोप लगा ही दिया। 

वैसे देखा जाय तो मोदी जी इससे पहले भी कांग्रेस पार्टी पर काले जादू का आरोप लगा चुके हैं, संयोग से उसका भी बिहार कनेक्शन है, क्योंकि 11 अप्रैल 2014 को उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर जब यह आरोप लगाया था तब वह पटना में चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सरकार ने 10 वर्षों में काला जादू करके देश से कोयला और नौजवानों का रोजगार गायब कर दिया. यह भी एक संयोग हैं कि कांग्रेस पार्टी का ब्लैक प्रोटेस्ट भी बेरोज़गारी को लेकर था. तब मोदी जी सत्ता में आने की तैयारी कर रहे थे, आज वो खुद पिछले 8 वर्षों से सत्ता में हैं मगर कांग्रेस पार्टी के काले जादू का अबतक वो कोई तोड़ नहीं निकाल पाए हैं, न ही काले जादू के खिलाफ कोई कानून बना पाए, न ही कोई ऐसी केंद्रीय एजेंसी बना पाए जो काला जादू करने वाली राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की घेराबंदी कर सके। 

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मोदी जी के श्रीमुख से आज के दौरे में काले जादू और झाड़ फूंक की बात सुनकर वह बात याद आ गयी कि पहले विदेशों में भारत की पहचान सपेरों और तांत्रिकों के देश के रूप में होती थी, आज हम देश की आज़ादी का 75वां महोत्सव मनाने जा रहे हैं, मोदी जी के मुताबिक है देश में अमृतकाल चल रहा है. मेक इन इंडिया, डिजिटल इन्डिया का दौर चल रहा है, भारत के विश्व गुरु होने के दावे किये जा रहे हैं, संकट की हर घड़ी में पूरी दुनिया के मोदी जी की ओर देखने की बात कही जाती है वही मोदी जी एक ऐसी पार्टी जिससे वह देश को मुक्त कराना चाहते हैं, काले जादू और झाड़ फूंक की बातें बड़ी अजीब सी लगती हैं और सवाल भी उठाती हैं कि क्या आज के अत्याधुनिक युग में भारत का प्रधानमंत्री काले जादू और झाड़ फूंक में विश्वास रखता है.

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