गुजरात में मुफ्त रेवड़ियों की सियासत

आर्टिकल/इंटरव्यूगुजरात में मुफ्त रेवड़ियों की सियासत

Date:

 

तौक़ीर सिद्दीकी

रेवड़ी का नाम आते ही मुंह में मिठास भर जाती है, वैसे तो यह एक स्वादिष्ट मिठाई है लेकिन आजकल इसकी चर्चा दूसरे सन्दर्भों में हो रही है. “मुफ्त की रेवड़ी”. मौजूदा राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण शब्द, जिसका मतलब मोदी जी अलग निकालते हैं और उनके पदचिन्हों पर चलने वाले अरविन्द केजरीवाल अलग. आप भी इसके मतलब अपने अनुसार निकाल सकते हैं. फ़िलहाल देश के कई राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए इस शब्द का महत्त्व और भी बढ़ गया है, मामला चैलेन्ज और रेफरेंडम तक पहुँच गया है. 

दरअसल मुफ्त रेवड़ी शब्द का राजनीतिक इस्तेमाल मोदी जी ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के अवसर पर 16 जुलाई को किया था. अवसर तो विकास कार्य के उद्घाटन का था लेकिन अपनी आदत के अनुसार मोदी जी हर अवसर में राजनीती का मौका ज़रूर खोजते लेते हैं. इस अवसर पर उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को मुफ्त रेवड़ी के बहाने अपने निशाने पर लिया और मुफ्त रेवड़ियां बांटने के कल्चर को देश के विकास के लिए हानिकारक बताया। इसके साथ ही यह आरोप भी लगाया कि यह सब वोट हासिल करने की साज़िश है. मोदी जी ने रेवड़ी कल्चर को घातक बताते हुए देश से हटाने की बात भी कह दी, शायद वो अरविन्द केजरीवाल के मुफ्त मॉडल (बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा) से खुश नहीं थे. 

Read also: तलाकनामा

मुफ्त रेवड़ियों का ज़िक्र करते समय मोदी जी शायद भूल गए कि वह चुनाव के समय देश कि 80 प्रतिशत जनता को राशन की रेवड़ी, किसानों को 6 हज़ार नकदी की रेवड़ी और न जाने कितनी नाना प्रकार की रेवड़िया खुद बाँट चुके हैं. अपने खास दोस्तों को बाँटने वाली रेवड़ियां तो एक अलग बात है. अब वही मोदी जी मुफ्त की रेवड़ियों के इतने विरोधी हो गए. उन्हें लगा कि मुफ्त रेवड़ियां बांटने का पेटेंट सिर्फ उनके ही पास मगर इस मामले में केजरीवाल अपने गुरु से भी आगे निकल गए. दिल्ली में मुफ्त बिजली, मुफ्त शिक्षा की रेवड़ियां लेकर वो मोदी जी के गुजरात पहुँच गए.

केजरीवाल न सिर्फ गुजरात पहुंचे बल्कि उन्होंने मोदी जी को एक तरह से चैलेन्ज भी कर दिया। मुफ्त की रेवड़ियां बांटने वालों का विरोध करने वालों की नीयत पर ही सवाल उठा दिया यहाँ तक कि चैलेन्ज भी कर दिया कि इस मुद्दे पर बहस हो जाय, बहस भी छोड़िये मुफ्त की रेवड़ियों पर पूरे देश में एक रेफरेंडम करा लिया जाय कि लोगों को मुफ्त की शिक्षा, मुफ्त का इलाज, मुफ्त की बिजली मिलनी चाइये कि न चाइये। लोगों ने भी सभा में खूब ज़ोर से चिल्लाकर कर कहा कि हाँ चाइये। कसम से 2014 की याद आ गयी जब हर बात के लिए जनता की भीड़ से पूछा जाता था कि बताओ चाइये कि न चाहिए और जनता बड़े जोश में चिल्लाती थी कि हाँ चाइये। 

Read also: ठोकर लगी तो सपा नरेश को दिखाई पड़ी ज़मीन

गुजरात मोदी जी की एक ऐसी रग है जिसपर कोई भी हाथ रख दे तो मोदी जी विचलित हो जाते हैं. केजरीवाल ने गुजरात में जब अपनी पहली गारंटी मुफ्त बिजली की घोषणा की तो उनका विचलित होना लाज़मी था, पहली बारिश में बह गए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के मौके पर शायद इसीलिए उन्होंने मुफ्त रेवड़ियों पर अपरोक्ष रूप से केजरीवाल को एक पाठ पढ़ाया था लेकिन केजरीवाल को भी शब्दों को लपकना आता है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने उसे फ़ौरन लपक लिया और उन्हीं के शब्दों से उन्ही के घर में उनपर हमला भी बोल दिया। अब बारी एकबार फिर मोदी जी की है. देखना है कि मुफ्त रेवड़ियों पर गुजरात जाकर केजरीवाल ने जो चैलेन्ज उन्हें दिया है उसका वो कैसे जवाब देते हैं. रही बात मुफ्त रेवड़ियों की तो उससे गुजरात वासियों की मौज ही मौज है. कोई भी दे, दिल्ली में ही दोनों बैठे हैं. बात सिर्फ इतनी ही है कि आपकी मुफ्त योजना योजना है और हमारी योजनाए रेवड़ियां?

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related