नई दिल्ली: कोरोना वायरस को मात देने के लिहाज से एक अच्छी खबर आई है। छोटे समूह पर किए गए अध्ययन के मुताबिक प्लाज्मा पद्धति से इलाज सुरक्षित प्रतीत हो रहा है और कोविड-19 से पीड़ित बच्चों के उपचार में संभवत: प्रभावी भी है।
प्लाज्मा पद्धति पर पहली रिपोर्ट
जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक ब्लड ऐंड कैंसर में प्रकाशित शोधपत्र प्राणघातक कोविड-19 के मरीज बच्चों के प्लाज्मा पद्धति से इलाज के संबंध में पहली रिपोर्ट है।
क्या कहता है अनुसंधान
अमेरिका स्थित फिलाडेल्फिया बाल अस्पताल (सीएचओपी) के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि सार्स-कोव-2 वायरस (कोरोना वायरस) के सपंर्क में आए बच्चों में उत्पन्न प्राणघातक जटिलताओं का इलाज करने के लिए कोई भी पद्धति सुरक्षित और प्रभावी सिद्ध नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि एक संभावित इलाज जिसका प्रयोग वयस्कों में किया गया है, वह है कोविड-19 के ठीक हो चुके मरीजों के रक्त से लिए गए प्लाज्मा का उपयोग।
प्लाज्मा पद्धति से उत्पन्न हो सकते हैं एंटीबॉडी
अनुसंधानकर्ताओं ने बताया कि मौजूदा वक़्त में इस पद्धति से बीमार मरीजों का इलाज वायरस के संक्रमण का मुकाबला करने के लिए शरीर में एंटीबॉडी उत्पन्न् करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले प्लाज्मा से इलाज कराने वाले वयस्कों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं, मगर बच्चों के इस पद्धति से इलाज को लेकर अध्ययन नहीं किया गया है। यह अध्ययन 4 मरीजों पर आधारित है जिन्हें सांस लेने में परेशानी की गंभीर बीमारी थी।

