मेरठ। अवैध हथियारों के लिए बिहार का मुंगेर जिला जहां देश भर में कुख्यात है तो वहीं पश्चिमी उप्र भी इस मामले में कुछ नहीं है। पश्चिमी उप्र के कुछ जिलों में देशी तमंचे से लेकर ग्लॉक,फ्रेंच और ब्रेटा जैसी विदेशी पिस्टल बनाने वाले हुनरमंद बैठे हैं। इन हुनरमंद के हाथों में अवैध हथियार बनाने की ऐसी जादूगरी है कि एक बार बस किसी हथियार को देखभर लेने से उस जैसा हूंबहू तैयार करने में कोई देर नहीं लगती।
मेरठ, शामली,अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर के अलावा मुरादाबार और बिजनौर के खादर में अवैध हथियार बनाने के अडडे हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा देश में अन्य भागों में जब चुनाव का मौसम होता है तो इन जिलों में अवैध असलाहों की फसल खूब लहलहाती है। उस दौरान इन जिलों के कुछ गांव और इलाकों में मिनी गन फैक्ट्रियां चलने लगती हैं। जहां सस्ते में मौत को उलगने वाले खिलौने सप्लाई होते हैं।
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अंग्रेजों से लड़ने से लिए गांव में बनते थे हथियार :
बता दें कि देश में अवैध हथियार निर्माण का काम अंग्रेजों के जमाने से शुरू हुआ। उस दौरान अंग्रेजों से लड़ने के लिए अवैध हथियार को बनाने का काम गांवों में गुपचुप तरीके से होता था। लेकिन आज ये अवैध हथियार निर्माण व बिक्री का धंधा राज्य की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बड़ी परेशानी इस बात की है कि अवैध हथियार बनाने के लिए कच्चा माल वैध तरीके से लाया जाता है। इससे देसी कट्टा, बंदूक और पिस्टल तक तैयार किया जाता है। जो कि दूसरे राज्यों को भी तस्करी कर भेजा जाता है। पश्चिमी उप्र में बने अवैध हथियार पंजाब,हरियाणा के अलावा दिल्ली और राजस्थान के बड़े गिरोह और बदमाशों को सप्लाई किए जाते हैं।
मेरठ में तो पंजाब पुलिस भी कई बार छापेमारी कर चुकी है। अवैध हथियार निर्माण से जुड़े लोगों ने तस्करी का नेटवर्क विकसित कर बड़ी संख्या में लोगों के द्वारा कोरियर के माध्यम से एक जगह से दूसरी जगह समान पहुंचाते हैं। जिनको हथियार पहुंचाने के एवज में रुपये दिए जाते हैं। पुलिस की कार्रवाई में अक्सर ये लोग और हथियार निर्माण से जुड़े लोग पकड़े जाते हैं। जबकि असली मास्टर माइंड तक पुलिस पहुंच ही नहीं पाती है।

