- बार्डर पर उतरकर चोर रास्तों से राज्य में कर रहे प्रवेश
- कोविड-19 जांच से बचने वाले बढ़ा सकते हैं कोरोना संक्रमण
देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना की स्थिति भयावह हो चुकी है। राज्य में कोरोना संक्रमण का प्रसार काफी तेजी के साथ हो रहा है। ऐसे में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिये आवश्यक कदम उठाने के साथ उत्तराखंड बार्डर पर अन्य राज्योें से आने वाले लोगों की कोविड-19 की जांच अनिवार्य कर दी गयी थी।
मगर इसे व्यवस्था की कमी कहें या अधिकारियों की नजरअंदाजी, उत्तराखंड बार्डर पर अनेक स्थानों पर अस्थायी बस अड्डे बन गये हैं। इस अस्थायी बस अड्डों पर अन्य राज्यों से आने वाले लोग उतरते हैं और चोर रास्तों से उत्तराखंड में प्रवेश कर लेते हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण को रोकने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण रोकने की दिशा में प्रयासरत राज्य सरकार ने अन्य राज्यों से आने वाले लोगों के लिये उत्तराखंड में प्रवेश करने से पहले चार दिन पूर्व तक की कोविड-19 की जांच रिपोर्ट जो नेगेटिव हो दिखाना अनिवार्य कर दिया था।
वहीं जिन लोगों ने कोविड-19 की जांच नहीं कराई हो उनको उत्तराखंड बार्डर पर ही आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने के बाद ही राज्य में प्रवेश करने की अनुमति दी गयी थी। इस जांच के खर्च को भी राज्य में आने वाले व्यक्ति को स्वयं ही उठाना है।
वहीं जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने तक बाहर से आये व्यक्ति को स्वयं द्वारा बताये गये स्थान पर ही क्वारंटाइन रहने के स्पष्ट आदेश भी दिये गये थे।
मगर सरकारी व्यवस्थाओं में रहने वाले छेद लोगों को बच निकलने का मौका दे ही देते हैं। कोविड-19 की जांच और तमाम पाबंदियों से बचने का रास्ता भी लोगों ने खोज लिया है। लोग सीधे तौर पर राज्य में प्रवेश करने की बजाये उत्तराखंड की सीमा पर बने अस्थायी बस अड्डों पर उतर जाते हैं।
वहां से वह बार्डर पर बने चैक पोस्ट से बचते हुए अन्य रास्तों से राज्य में प्रवेश कर जाते हैं। सब कुछ जानते हुए भी ऐसे लोगों को रोकने में उत्तराखंड प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। लेकिन बिना जांच कराये राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों के जरिये राज्य में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंकाएं भी बढ़ रही हैं। वहीं जांच से बचने वाले अपने पैैसे भले ही बचा रहे हों मगर वह कोरोना को राज्य में हावी होने के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।

