युवा मुख्यमंत्री के साथ युवा प्रत्याशियों को प्राथमिकता देने का अंदेशा
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही टिकट को लेकर नेताओं का राजधानी की ओर चक्कर लगाना शुरु हो गया है। लेकिन भाजपा के ‘युवा प्रदेश-युवा मुख्यमंत्री’ के नारे ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को चिंता में डाल दिया है। बताया जा रहा है कि भाजपा अब विधानसभा चुनाव में युवा कैंडिडेट पर दांव लगाने की तैयारी कर रही है। यानी प्रदेश में मुख्यमंत्री ही नहीं पूरी सरकार को युवा बनाने की तैयारी चल रही है। यदि ऐसा हुआ तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का टिकट कटना तय है।
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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में नई रणनीति अपनाते हुए भाजपा ने ‘युवा प्रदेश-युवा मुख्यमंत्री’ का नारा बुलंद किया था। इससे मिली प्रतिक्रियाओं से उत्साहित भाजपा ने अब एक कदम और आगे बढ़ाते हुए युवाओं को टिकट देने में प्राथमिकता अपनाने का विचार बनाया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भी आगामी चुनाव में युवाओं को प्राथमिकता देने की बात कह चुके हैं। वही भाजपा के आंतरिक सर्वे के आधार पर कमजोर प्रदर्शन करने वाले विधायकों का टिकट काटे जाने भी की भी संभावना हैं।
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इन सब बातों को देखते हुए पार्टी में 60 वर्ष से अधिक आयु वाले नेताओं को अपना टिकट कटने की आशंका सता रही है। हालांकि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने 60 साल की उम्र के नेताओं को नजरअंदाज किए जाने की बात से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि नेताओं की राजनीतिक पारी तो 50 साल पूरे होने के बाद ही शुरू होती है। टिकट बंटवारे के दौरान पार्टी सभी बातों का ध्यान रखेगी।
लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में ही आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की जाने की पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में युवा मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव में युवा प्रत्याशियों को ही उतारने को प्राथमिकता दे सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो 2 दर्जन से अधिक वर्तमान विधायकों के टिकट पर खतरा मंडरा सकता है। यही आशंका भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की रातों की नींद उड़ा रही है। बढ़ती उम्र में भी यह नेता उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और देश की राजधानी दिल्ली की ओर भागा-दौड़ी कर रहे हैं ताकि उनका टिकट कटने से बच जाए।

