अमित बिश्नोई
BCCI के सचिव और एशिया क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष जय शाह के उस बयान पर जिसमें टीम इंडिया केh पाकिस्तान जाकर एशिया कप खेलने से इंकार किया गया था,तीखी प्रतिक्रिया दी है. पीसीबी ने गीदड़ भभकी देते हुए कहा कि ऐसे बयान का असर 2023 में भारत में खेले जाने वाले ICC एकदिवसीय विश्वकप पर पड़ सकता है. एक तरह से पीसीबी ने कहा है कि अगर भारतीय टीम एशिया कप खेलने पाकिस्तान नहीं जाएगी तो पाकिस्तान की टीम भी विश्व कप खेलने भारत नहीं जाएगी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रवक्ता की और जारी पत्र में कहा गया है कि वे एशियाई क्रिकेट कौंसिल अध्यक्ष जय शाह के बयान से हैरान और निराश हैं, यह बयान एसीसी बोर्ड या पीसीबी से परामर्श किए बिना दिया गया। हालाँकि पीसीबी यह भूल रही है कि जय शाह BCCI के सचिव भी हैं और एशिया कप में पाकिस्तान न जाकर खेलने का फैसला भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने किया है न कि जय शाह ने और बोर्ड का सचिव होने के नाते ही उन्होंने इस फैसले का सार्वजानिक एलान किया।
पीसीबी के पूरे पत्र में जय शाह के इस बयान को ACC के अध्यक्ष के रूप में ही ज़िक्र किया गया है. पीसीबी के प्रवक्ता का कहना है कि जय शाह का पाकिस्तान से एशिया कप ट्रांसफर करने का बयान एकतरफा है, उनका बयान आईसीसी और एसीसी को बांटने के बराबर है. प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस बयान से 2023 में भारत में होने वाले विश्व कप और 2024 से 2031 तक भारत में होने वाले आईसीसी के आयोजनों में पाकिस्तान की भागीदारी प्रभावित हो सकती है।
पीसीबी के मुताबिक जय शाह की अध्यक्षता में हुई एसीसी की बैठक में एशिया कप की मेजबानी पाकिस्तान को सौंपी गई थी। एसीसी अध्यक्ष के बयान पर एसीसी की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं मिला है. पीसीबी ने एसीसी से इस अहम और संवेदनशील मुद्दे पर आपात बैठक बुलाने का भी अनुरोध किया है। वहीँ जहाँ तक जय शाह का बयान है तो उन्होंने एशिया में भारत के न खेलने की बात कही है न कि एशिया कप पाकिस्तान से स्थानांतरित करने की. जय शाह ने यह ज़रूर कहा कि ACC का अध्यक्ष होने के नाते वो पाकिस्तान से इस बारे में बात ज़रूर करेंगे कि टूर्नामेंट को किसी न्यूट्रल वेन्यू पर शिफ्ट कर दिया जाय. यह पूरी दुनिया को मालूम है दोनों देशों के बीच राजनीतिक हालात कैसे हैं। भारत में पाकिस्तान समर्थित आतंकी गतिविधियां लगातार जारी हैं, ऐसे में पाकिस्तान यह कैसे उम्मीद कर सकता है कि भारत पाकिस्तान जाकर क्रिकेट खेले। पाकिस्तान अगर भारत आकर खेलने के लिए राज़ी है तो यह उसकी मजबूरी है क्योंकि वो पहले क्रिकेट में अकेलेपन से जूझ रहा है, उसके यहाँ अब जाकर टीमों ने दौरा करना शुरू किया है. उसके लिए भारत का पाक्सितान जाना उसके लिए बड़ा लाभदायक है लेकिन भारत के साथ ऐसी कोई मजबूरी नहीं है. विश्व कप में अगर पाकिस्तान की टीम भारत नहीं भी आएगी तो उसका भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
पाकिस्तान की यह गीदड़ भभकी सिर्फ दिखावा है क्योंकि उसके लिए विश्व कप का बहिष्कार करना इतना आसान नहीं है. फिर उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि ICC और ACC टूर्नामेंट में बहुत फर्क होता है. एशिया कप में पहले भी ऐसा हो चूका है जब टीमों ने टूर्नामेंट का बॉयकॉट किया। श्रीलंका के साथ तनावपूर्ण क्रिकेट संबंधों के कारण भारत ने 1986 के टूर्नामेंट का बहिष्कार किया। भारत के साथ तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों के कारण पाकिस्तान ने 1990-91 के टूर्नामेंट का बहिष्कार किया और इसी कारण से 1993 के टूर्नामेंट को भी रद्द कर दिया गया था। तो ऐसे में जय शाह ने अगर परत में एशिया कप न जाने की बात कही तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा. पीसीबी को विधवा विलाप की जगह सच्चाई को समझना चाहिए। भारत में होने वाले विश्व कप या दूसरे ICC टूर्नामेंट का उसे बॉयकॉट करना हो तो करे लेकिन उसे यह अच्छी तरह याद रखना चाहिए इसका भुगतान तो पाकिस्तान को ही भुगतना पड़ेगा, भारत को नहीं.

