Terrorism: पंजाब सेक्टर में बीएसएफ द्वारा मार गिराए गए अनेक ड्रोन ‘क्वाडकॉप्टर डीजेआई मेट्रिक्स 300 आरटीके सीरिज’ के हैं। ड्रोन का फ्लाइंग टाइम और भार सहने की क्षमता से कीमत तय होती है। साल में सौ ड्रोन मार गिराए जाते हैं, तो कीमत तीन करोड़ रुपए के पार होती है।
जम्मू कश्मीर में आतंकी वारदातों को बढ़ाने में पाकिस्तान खूब रुपए खर्च कर रहा है। ये बात अलग है कि वह खुद कंगाल है। भारत में आतंकवादियों भेजने से लेकर उन्हें हथियार एवं दूसरे तकनीकी उपकरण मुहैया कराने में चीन से मदद मिल रही है। खासतौर पर ड्रोन के मामले में चीन, पाकिस्तान की पूरी मदद कर रहा है। बॉर्डर पर पाकिस्तान की तरफ से हथियार एवं ड्रग्स लेकर जितने ड्रोन आते हैं।
वे अधिकांश चीन निर्मित होते हैं। हालांकि वो सभी असेंबल पाकिस्तान में होते हैं। मौजूदा समय में पाकिस्तान सबसे खराब आर्थिक स्थिति के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ पाकिस्तान में महंगाई आसमान छू रही है, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से राहत पैकेज नहीं मिल रहा। इसके बावजूद पाकिस्तान, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष 18 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है।
‘आईएसआई’ ने एक नया तरीका ढूंढा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधों से बचने के लिए अब कई सालों से पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी ‘आईएसआई’ ने नया तरीका तलाश है। आईएसआई ने जम्मू-कश्मीर में अपने मुखौटे संगठन खड़े किए हैं। वहां मौजूद पाकिस्तानी आतंकियों की मदद, यहीं मुखौटे संगठन कर रहे हैं। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के छद्म समूह के तौर पर ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ को खड़ा किया है। ‘जैश-ए-मोहम्मद’ ने इसी तरह से अपनी सक्रिय प्रॉक्सी विंग ‘पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट’ (पीएएफएफ) तैयार की है।
इस वर्ष पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार, निचले स्तर पर है। पाकिस्तान की नेशनल अकाउंट कमेटी ने वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर का अनुमान 0.29 प्रतिशत बताया है। कंगाली के हाल पर पहुंचा पाकिस्तान, आतंकवाद पर पैसा खर्च करने से बाज नहीं आ रहा है। आर्थिक मार के बावजूद भारत की सीमा में घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तान 18 करोड़ रुपए हर साल खर्च करता है। इसमें घुसपैठियों और ड्रोन, शामिल हैं।
पाकिस्तान ने तैयार की ‘बॉर्डर एक्शन टीम’
सुरक्षा बलों के सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी आईएसआई और उसके आतंकी संगठन, भारतीय सीमा में लगातार घुसपैठ करने का प्रयास करते हैं। हालांकि अधिकांश मौकों पर भारतीय सुरक्षा बल, घुसपैठ को असफल करते हैं। मौजूदा समय में बॉर्डर पर सीजफायर होने के बाद पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स और आईएसआई के साथ मिलकर आतंकियों की घुसपैठ कराती है। डेढ़ दशक से पाकिस्तानी सेना ने मुखौटे वाले स्नाइपर और बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) को सीमा के आसपास तैनात किया हुआ है। बैट में आतंकी संगठनों के सदस्य शामिल हैं।
इन्हें पाकिस्तानी सेना की तरफ से तय राशि मिलती है। अगर ये भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाने में कामयाब रहते हैं। तो इंसेंटिव अलग से मिलता है। भारतीय सेना या बीएसएफ की जवाबी फायरिंग में ये लोग मारे जाते हैं। इन्हें शहीद का दर्जा और 12 लाख रुपये मिलते हैं। सम्मान के साथ इनका अंतिम संस्कार किया जाता है।

