न्यूयार्क। मंकीपॉक्स के प्रकोप में विशेषज्ञ भले इसके लक्षणों और प्रसार को लेकर आश्वस्त दिख रहे हों। लेकिन अब तक दुनियाभर में मिले 47 हजार मरीजों में अलग-अलग तरह के संक्रमण ने इन विशेषज्ञों का सिरदर्द बढ़ा दिया। अमेरिका यूरोप में क्लीनिकों पर पहुंचे संक्रमितों में मंकीपॉक्स के लक्षणों के उलट मच्छर के काटने का निशान, मुंहासे नजर आ रहे हैं तो कुछ के शरीर पर घाव न होने के बावजूद उन्हें निगलने और मल-मूत्र त्यागने में तेज दर्ज का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा, कुछ मंकीपाक्स संक्रमितों में सिरदर्द, अवसाद, भ्रम और सीजर जैसी परेशानी उभरी हैं। ऐसी मरीज भी मिले हैं जिन्हें आंखों में संक्रमण या हृदय की मांसपेशियों में सूजन से दो चार होना पड़ रहा है। वहीं, कई मरीजों में बुखार, दर्द और कमजोरी जैसा लक्षण ही नहीं दिखा। यहां तक कि उन्हें संक्रमित होने का बारे में नहीं पता। क्योंकि न तो वह किसी घाव वाले व्यक्ति के संपर्क में आए और न किसी से शारीरिक संबंध बनाया था। मंकीपॉक्स के पुराने लक्षणों के उलट इन नई परिस्थितियों ने विशेषज्ञों के सामने चुनौती पैदा कर दी है। अटलांटा के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ0 बोघुमा तितांजी के अनुसार हमें मरीजों में बिलकुल अलग प्रकार के लक्षण देखने को अब मिल रहे हैं।
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वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि मंकीपॉक्स वायरस संक्रमित के ठीक होने के बाद भी कई हफ्तों के बाद लार, सीमन और अन्य शारीरिक तरल में ये मौजूद रहता है। लेकिन कई विशेषज्ञ का मानना है कि बीमारी का संक्रमण यौन संबंधों से होता है। मंकीपॉक्स पर रिपोर्ट लिखने वाले डॉ0 अबरार करन ने कैलिफोर्निया के मरीजों का हवाला देते हुए कहा कि उनके गले में वायरस पाया गया। उन्हें कोई श्वसन संबंधी तकलीफ नहीं हुई। उनका कहना है कि यह वायरस का प्रसार लक्षण रहित लोगों के जरिए भी हो सकता है।

