संसद की सुरक्षा और विपक्षी सांसदों को निलंबित करने के मामले को लेकर विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने और जनता के बीच जाने का फैसला किया है, इसी के मद्देनज़र विपक्षी पार्टियों सांसदों ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला। इसके अलावा इंडिया गठबंधन ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन में सभी पार्टियों के बड़े नेता शामिल हुए। इस मौके पर कांग्रेस संसद राहुल गाँधी ने इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के निलंबन को जनता का अपमान बताया। विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, एनसीपी नेता शरद पवार, आरजेडी सांसद मनोज झा, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी, डी राजा (सीपीआई), त्रिची शिवा (डीएमके) शामिल हुए।
जंतर मंतर पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा मोदी सरकार के कार्यकाल में 146 सांसदों का निलंबन देश की 60 फीसदी जनता का अपमान है। राहुल गांधी ने कहा कि देश का युवा आज मोबाइल फोन में समय बिता रहा है क्योंकि मोदी जी ने इन युवाओं बेकार कर दिया है, उनके पास कोई रोजगार नहीं है। सरकार ने उनसे रोज़गार छीन लिया है। राहुल गाँधी ने कहा यही देश की सच्चाई है. संसद में घुसकर हंगामा करने वालों के बारे में राहुल ने कहा कि वो युवा थे, उन्होंने संसद में सिक्योरिटी ब्रीच जरूर की लेकिन वो भी सरकार की गलती है। सरकार बेरोज़गारी की बात नहीं करती, मीडिया बेरोज़गारी का मुद्दा नहीं उछालती. मीडिया ये नहीं बताती कि इस सरकार ने 146 सांसदों को निलंबित कर दिया गया और न ही इसपर सरकार से कोई सवाल पूछती है.
राहुल गांधी ने कहा कि जब हम सरकार से सिक्योरिटी ब्रीच के बारे में सवाल पूछते है, पूछते हैं कि आखिर इस घटना की वजह क्या है, पूछते हैं कि इन युवाओं ने ऐसा क्यों किया तो सरकार सवाल पूछने वालों को संसद से ही निकाल देती है. सरकार को मालूम होना चाहिए कि जिन 146 सांसदों को निलंबित किया गया है वो सिर्फ एक व्यक्ति नहीं हैं बल्कि 60 फीसद हिंदुस्तान की जनता की आवाज हैं। राहुल ने कहा कि हर सांसद को वोटों के रूप में लाखों लोगों का समर्थन मिलता है, सरकार ने निलंबित सांसदों की क्षेत्र की जनता का मुंह बंद किया है।

