आज ही के दिन दुनिया को रुला गए थे युवराज सिंह

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आज ही के दिन दुनिया को रुला गए थे युवराज सिंह

संन्यास पर मां की आंखों से भी छलके थे आंसू

सुबह से ही ट्विटर पर मिस यू युवी ट्रेंड कर रहा है. युवराज सिंह के फैंस अपने सुपरस्टार को याद जो कर रहे हैं. दरअसल, आज ही के दिन ठीक एक साल पहले सफेद गेंद प्रारूप में भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े मैच विजेता ने संन्यास लिया था. मुंबई में इंटरनेशनल क्रिकेट से अलविदा लेने की घोषणा करने के दौरान न सिर्फ उनके चाहने वाले बल्कि उनकी मां शबनम और खुद युवराज बेहद भावुक हो गए थे.

टीम इंडिया का संकटमोचन
युवराज सिंह का अंतरराष्ट्रीय करियर उतार-चढ़ाव वाला रहा, लेकिन 19 साल के अपने क्रिकेट करियर में एक दशक से भी ज्यादा समय तक वह टीम इंडिया के संकटमोचक रहे. अपने संन्यास के दौरान युवी ने बकायदा लंबा-चौड़ा कार्यक्रम रखा था. देशभर की मीडिया को बुलाया गया था. इस दौरान युवराज सिंह ने अपने दिल की कसक बयां की थी. अधूरी इच्छा का इजहार किया था. मन की वह बात कह दी थी, जो उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रही थी.

हो गई थी आंख नम
युवराज ने कहा था कि, मैं बता नहीं सकता कि क्रिकेट ने मुझे क्या और कितना दिया है. मैं यहां बताना चाहता हूं कि मेरे पास आज जो कुछ है, क्रिकेट ने दिया है. क्रिकेट ही वह वजह है, जिसके कारण मैं आज यहां बैठा हूं. इस दौरान उनकी आंखें डबडबा गई. पिता के अलावा युवी का पूरा परिवार उनके साथ था. मां शबनम एकदम अपने बेटे को देखती रहीं थीं. आंखों से आंसू बहते गए. अपने वक्तव्य के अंत में युवी ने अपने इस शानदार सफर के लिए परिवार और खासकर मां का धन्यवाद दिया था.

क्या बोले थे युवराज?
युवराज ने कहा था कि, मैं अपने परिवार, खासतौर पर मां का धन्यवाद करना चाहूंगा, जो आज मेरे साथ यहां मौजूद हैं. मेरी मां हमेशा से मेरे लिए शक्ति का स्रोत रही है और इन्होंने मुझे दो बार जन्म दिया है. पूरे घटनाक्रम के दौरान शबनम सिंह बेहद भावुक दिखीं. युवराज ने पत्नी हेजल कीच का भी धन्यवाद दिया था. उन्होंने कहा था, मेरी पत्नी ने कठिन समय में मेरा साथ दिया है. मेरे करीबी दोस्त, जो मेरे कारण बीमार पड़ जाते थे, लेकिन इसके बावजूद हमेशा मेरे साथ खड़े रहे. मैं जिन लोगों से प्यार करता हूं, आज वे सब मेरे साथ हैं, सिवाय मेरे पिता के, इसलिए मेरे लिहाज से यह आगे बढऩे का सबसे अच्छा समय है.

विश्व कप जीतना सपना था
युवराज ने कहा, 2011 विश्व कप जीता, चार बार मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द टूर्नामेंट बनना मेरे लिए किसी सपने के सच जैसा होना था. इसके बाद मुझे पता चला कि मैं कैंसर से पीडि़त हूं. उस सच को मैंने आत्मसात किया. जब मैं अपने करियर के सर्वोच्च मुकाम पर था, तभी यह सब हुआ. युवराज ने कैंसर पर विजय पाकर भारतीय टीम में वापसी की. 2016 चैंपियंस ट्रॉफी में भी खेले, लेकिन इसके बाद बीसीसीआई उनसे परे देखना शुरू कर चुका था. फिर खराब फॉर्म और फिटनेस ने उनका करियर डुबा दिया.
युवराज खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें भारत के लिए 400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिला. 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल, 2004 में लाहौर में पहला टेस्ट शतक, 2007 में इंग्लैंड में वनडे सीरीज, 2007 में टी-20 विश्व कप में एक ओवर में छह छक्के और 2011 विश्व कप जीतना युवी के करियर के कुछ अहम माइलस्टोन हैं.

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