Site icon Buziness Bytes Hindi

Obesity: भारतीय बच्चों में मोटापा बना महामारी, 2030 तक हर दसवां मोटा बच्चा भारत में

au0608

Obesity: भारत में बच्चों का मोटापा महामारी बन रहा है। अगर हालात ये ही रहे तो 2023 में दुनिया का हर दसवां मोटा बच्चा भारत में होगा। भारत उम्र के मुक़ाबले छोटे क़द के बच्चों के मामले में दुनियाभर में पहले से पहले नंबर था। अब भारत में बच्चों का मोटापा चिंताजनक स्तर तक बढ़ रहा है। विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि तुरंत नहीं निबटा गया तो ये महामारी का रूप ले सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक यदि बीएमआई 25 से ऊपर है तो व्यक्ति मोटा होता है। नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार (ये सर्वे 2019-21 में हुआ था) भारत में पांच साल से कम उम्र के 3.4 फीसद बच्चों का वज़न अधिक है। 2015-16 में ये आंकड़ा 2.1 प्रतिशत रहा था।

2 करोड से अधिक बच्चों का वजन मोटापे की श्रेणी में

यूनिसेफ़ की 2022 की वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस के अनुसार भारत में 2 करोड़ 70 लाख से अधिक बच्चे मोटापे की श्रेणी में हैं। यानी 2030 तक दुनियाभर में दस में से एक मोटा बच्चा भारत में होगा। एनएफएचएस सर्वे भारत में स्वास्थ्य और सामाजिक सूचकांकों का विस्तृत सर्वे है। जिसे सरकार करवाती है। ये संख्या भले देखने में कम लगे। लेकिन भारत की आबादी बहुत अधिक हैं। ऐसे में बहुत कम प्रतिशत वास्तव में बहुत बड़ी संख्या हो सकता है।

मोटे होते जा रहे हैं भारतीय ख़तरनाक

न कोई बीमारी न खाने की लत फिर भी वज़न 330 किलो कैसे? मोटापे से लड़ने और इसके आर्थिक प्रभावों को कम करने के सूचकांक मामले में भारत 183 देशों में 99वें पायदान पर है। मोटापे का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव साल 2019 में 23 अरब डॉलर है। जो 2060 तक बढ़कर 479 अरब डॉलर होगा। भारत में बच्चों का मोटापा स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शरीर में चर्बी अधिक होने से गैर-संक्रामक बीमारियां के फैलने का ख़तरा बढ़ता है। जिसमें टाइप-2 डाइबिटीज़, 13 तरह के कैंसर, दिल और फेफड़ों से संबंधी बीमारियां शामिल हैं। इसके कारण समय से पहले लोगों की मौत हो जाती है। बीते साल दुनियाभर में 28 लाख मौत का कारण मोटापा ही रहा।

वयस्कों में मोटापा मामले में भारत पांच शीर्ष देशों में

पिछले कुछ सालों में वयस्कों में मोटापा मामले में भारत पहले से दुनिया के पांच शीर्ष देशों में है। 2016 में एक अनुमान के मुताबिक भारत में क़रीब 13.5 करोड़ लोगों का वज़न अधिक था या मोटापे का शिकार थे। ये संख्या देश में तेजी से बढ़ रही है। भारत में अभी 5 साल से कम उम्र के 36 फीसद बच्चे का क़द उम्र के हिसाब से छोटा है। कुपोषण के ख़िलाफ़ हम जितनी बढ़त हासिल कर रहे हैं उतना नुक़सान अधिक पोषण पहुंचा रहा है। यूनीसेफ के डॉ. डे वाग्त के मुताबिक बच्चों में मोटापा हर सामाजिक और आर्थिक वर्ग की समस्या बनता है। लेकिन ये शहर के अमीरों में ज्यादा है। जहां बच्चों को फैट, शुगर और नमकीन डाइट दी जाती है। 2019 में दिल्ली और उसके आसपास के उप-नगरों में एक सर्वे हुआ था। इसमें पता चला था कि 40 प्रतिशत बच्चे (5-9 साल), किशोर (10-14 साल) और एडलेसेंट (15-17 साल) या तो मोटे थे या वजन अधिक था।

Exit mobile version