नई दिल्ली। कोरोना महामारी के दौरान भारत दुनिया के देशों के लिए एक बड़ा मददगार बनकर उभरा। भारत ने 98 देशों को 23.50 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराई। वैक्सीन मैत्री पहल के तहत भारत ने यह कदम उठाया। नीति आयोग उपाध्यक्ष डॉ0 सुमन के. बेरी ने यह बात न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय राजनयिक मंच को संबोधित करते हुए कही। भारतीय वैज्ञानिक रिसर्च और वैक्सीन उत्पादन तंत्र की तारीफ करते हुए बेरी ने कहा कि भारत ने कोरोना संक्रमण काल के प्रभाव को कम करने को कई पहल की। जीवन और आजीविका की रक्षा के लिए भारत की ओर से कई कदम उठाए गए। बेरी ने कहा कि भारत में वैक्सीन उत्पादन के दम पर ही सबसे बड़ा निशुल्क कोरोना टीकाकरण अभियान चलाया जा सका। 1.98 अरब से ज्यादा वैक्सीन की डोज देश के सभी भागों में पहुंचाई है। नीति आयोग अध्यक्ष ने कहा कि वैक्सीन ‘मैत्री’ के अंतगर्त भारत ने दुनिया के 98 देशों को भी 23.50 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज की सप्लाई की। मंत्रिस्तरीय राउंड टेबल सम्मेलन में बेरी ने कहा देश में कोरोना संक्रमण के बाद आर्थिक विकास दर में रिकवरी के लिए भारत सरकार ने पूंजीगत व्यय पर ध्यान दिया। जिसके तहत अब विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का भी निर्माण किया सकता है।
Read also: Monkeypox in India: भारत के केरल में मिला मंकीपॉक्स संक्रमित मरीज,देश के अन्य राज्यों में अलर्ट
पर्यावरण चर्चा पर बेरी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने सीओपी-27 में भारत के लक्ष्य को स्पष्ट किया। हम इसके लिए वचनबद्ध हैं। विकास लक्ष्यों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम विकास व पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चले हैं। नीति आयोग उपाध्यक्ष डॉ. बेरी ने विकास को लेकर बने संयुक्त राष्ट्र के मंच को संबोधित करते हुए पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई ‘गति शक्ति योजना’ का जिक्र किया। उन्होंने मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर प्रकाश डाला। भारत ने जनवरी 2021 में ‘वैक्सीन मैत्री’ योजना शुरू की थी। यह विश्व स्तर पर कम आय और विकासशील देशों को भारत में बने टीके मुहैया कराने की पहल थी। इसके तहत म्यांमार,बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मॉरीशस, मालदीव, ब्राजील, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को, मैक्सिको, अफगानिस्तान, नाइजीरिया, डीआर कांगो, ब्रिटेन समेत अन्य देशों को कोरोना वैक्सीन भेजी थी। भारत ने देश में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू करने के चार दिन बाद यानी 20 जनवरी 2021 को वैक्सीन को विदेशों में भेजना बंद कर दिया।

