- मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा, जारी है सीएए का विरोध
- कहा, सीएए विरोधी आंदोलन से मिली किसान आंदोलन को प्रेरणा
सहारनपुर। विवादित कृषि कानूनों को वापस जाने की घोषणा किए जाने के बाद अब सीएए को भी निरस्त करने की मांग उठने लगी है। जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने का स्वागत किया है। अरशद मदनी ने कहा कि कानून वापसी के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में लोगों की शक्ति सर्वोपरि है।
लोगों का ये सोचना बिल्कुल गलत है कि सरकार और संसद ही सर्वाधिक शक्तिशाली है। किसानों के रूप में जनता ने अपनी ताकत का परिचय दिया है। कहा कि इस आंदोलन की सफलता दिखाती है किसी भी आंदोलन को कुचला नहीं जा सकता।
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अरशद मदनी ने किसान आंदोलन की सफलता का मार्ग सीएए विरोधी आंदोलन से होकर जाना बताया। अरशद मदनी के अनुसार के सीएए के खिलाफ हुए आंदोलन में पुरुषों के समान महिलाएं और बुजुर्ग भी दिन- रात चल रहे आंदोलन में शामिल हुए। लोगों पर अत्याचार किये गए, गंभीर मुकदमे लगाए गए। लेकिन आंदोलन को कुचला नहीं जा सका। सीएए के खिलाफ हुए आंदोलन से प्रेरित होकर किसान आंदोलन में भी उसी प्रकार जनसमर्थन हासिल किया गया।
अरशद मदनी ने कहा कि कृषि कानूनों की तरह सीएए कानून को भी वापस किया जाना चाहिए। अरशद मदनी के अनुसार आंदोलन में शामिल हुए लोग कोरोना के कारण अपने घरों को लौट गए थे लेकिन विरोध अब भी जारी है।
अरशद मदनी का बयान यह जाहिर करता है कि किसान आंदोलन के बाद अब सीएए विरोधी आंदोलन सरकार के लिए परेशानी का कारण बनेगा। किसानों की तरह सीएए विरोध को भी व्यापक रूप देकर सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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कृषि कानूनों को वापस लेने वाली सरकार क्या सीएए को भी वापस लेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन यह तय है कि देश की राजनीति में अभी अनेक उतार-चढ़ाव आने बाकी हैं। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा पर दबाव बनकर एल बार फिर से उसे झुकाने का प्रयास जरूर किया जाएगा।

