आज़ादी के बाद से उत्तर प्रदेश विधान परिषद पहली बार नेता प्रतिपक्ष से महरूम हो गयी है, विधान परिषद् में अब कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं है क्योंकि समाजवादी पार्टी से विधान परिषद् में नेता विपक्ष के पद से लाल बिहारी यादव की मान्यता समाप्त कर दी गयी है, बता दें कि यूपी विधानपरिषद पहले ही कांग्रेस विहीन हो चुकी है और यह भी आज़ादी के बाद पहली बार हुआ है.
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दरअसल समाजवादी पार्टी की नेता प्रतिपक्ष पर मान्यता समाप्त करने वजह यह है कि उत्तर प्रदेश की विधान परिषद में उसके सदस्यों की सख्या अब 10% से कम हो गयी है यही कारण है कि पार्टी से विधान परिषद में नेता विरोधी दल का पद छीन लिया गया. सदन के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने नेता प्रतिपक्ष समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव की नेता प्रतिपक्ष की मान्यता समाप्त कर दी। बता दें कि बुधवार को विधान परिषद में सपा के 2 एमएलसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्य , चौधरी भूपेंद्र सिंह समेत 12 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हुआ है। लेकिन अभी हाल ही में हुए विधान परिषद के लिए हुए चुनावों में केशव प्रसाद मौर्य और चौधरी भूपेंद्र सिंह ने विधान परिषद् में वापसी कर ली है।
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दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के 6 सदस्यों जगजीवन प्रसाद‚ बलराम यादव‚ रणविजय सिंह‚ डॉ. कमलेश कुमार पाठक‚ राम सुंदर दास निषाद और शतरुद्र प्रकाश का कार्यकाल बुधवार को समाप्त हो गया। साथ ही बहुजन समाज पार्टी के भी तीन सदस्यों का कार्यकाल बुधवार को खत्म हो गया है। पिछले दिनों यूपी MLC चुनाव के बाद बीजेपी विधान परिषद् में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है. MLC इलेक्शन में बीजेपी ने 27 सीटों में से 24 पर जीत हासिल की थी। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी विधान परिषद में मौजूदगी समाप्त हो चुकी है. विधानपरिषद में कांग्रेस का मात्र एक सदस्य था जिसका कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो गया था.

