अमित बिश्नोई
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया बंद हो चुकी है और नाम वापसी की प्रक्रिया भी बंद होने वाली है लेकिन नामांकन दाखिल करने को लेकर MVA में अभी सबकुछ सेटल नहीं हुआ है विशेषकर उद्धव गुट और कांग्रेस में, जबकि एनसीपी शरद पवार गुट ने अपने हिस्से के उम्मीदवार अंतिम तौर पर तय कर दिए हैं और उनका नामांकन भी हो चूका हैं और कहीं भी आपसी रस्साकशी जैसी कोई बात नहीं है. वहीँ उद्धव ने खुलकर कांग्रेस पार्टी पर नाराज़गी जताई है क्योंकि कई सीटों पर दोनों तरफ के लोगों ने नामांकन कर दिया है, अब कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे की नाराजगी के कारण कांग्रेस बैकफुट पर आयी है या फिर ये कहिये कि उसने कुछ लचक दिखाई है. कांग्रेस ने कहा है कि भले ही कुछ सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर दिया है, लेकिन चुनाव वही लड़ेगा जिसे पार्टी का सिम्बल मिलेगा यानि कांग्रेस की तरफ से सेटलमेंट की कोशिश हो रही है. महाराष्ट्र चुनाव में कांग्रेस प्रभारी रमेश चेन्निथला और कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले मुताबिक कुछ सीटों पर उसके उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले लेंगे। उनका कहना है कि महाविकास अघाड़ी में कोई दोस्ताना लड़ाई नहीं होने जा रही है। हम एकजुट होकर चुनाव लड़ने जा रहे हैं, जिन लोगों को एबी फॉर्म दिया है सिर्फ वही चुनाव लड़ पाएंगे। जिन सीटों पर फॉर्म नहीं दिया गया है, उन सीटों पर उम्मीदवारों को अपना नाम वापस लेना होगा।
दरअसल ये स्थिति बनने पर शिवसेना उद्धव गुट के प्रवक्ता संजय राउत ने खुलकर ऐतराज़ जताया और कहा कि सांगली विवाद दोहराया नहीं जाना चाहिए , उनके मुताबिक कांग्रेस ने उन सीटों पर भी उम्मीदवार उतार दिए हैं जिन पर हम चुनाव लड़ रहे हैं। संजय राउत ने यह भी कहा कि लोकसभा का सांगली मॉडल विधानसभा चुनाव में दोहराया जा रहा है। दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान सांगली सीट शिवसेना (यूबीटी) को दे दी गई थी। लेकिन वहां से कांग्रेस के बागी विशाल पाटिल ने ताल ठोंक दी थी और शिवसेना (यूबीटी) उम्मीदवार तीसरे स्थान पर खिसक गया। चुनाव जीतने के बाद विशाल पाटिल कांग्रेस में शामिल हो गए। उद्धव गुट का कहना है कि जल्द ही बैठक होगी और उन सीटों से उम्मीदवारों को वापस लेने को कहा जाएगा, जहां पार्टियों ने गठबंधन तोड़कर उम्मीदवार उतारे हैं। उद्धव और शिवसेना (यूबीटी) ने करीब एक दर्जन सीटों पर मिलकर उम्मीदवार उतारे हैं। जिन सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए हैं, उनमें बांद्रा ईस्ट, नासिक सेंट्रल और रामटेक सीटें शामिल हैं।
विदर्भ की रामटेक सीट पर चंद्रपाल चौकसे ने कांग्रेस के सिंबल पर और विशाल बारबेटे ने शिवसेना (यूबीटी) के सिंबल पर चुनाव लड़ा है। इसी तरह नासिक सेंट्रल सीट पर उद्धव की सेना और कांग्रेस दोनों ने उम्मीदवार उतारे हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने बसंतराव गीते को अपना सिंबल दिया है। गुलाम गौस ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा है। बांद्रा ईस्ट सीट पर कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) दोनों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस ने यहां से अर्जुन सिंह को सिंबल दिया है, जबकि शिवसेना (यूबीटी) से वरुण सरदेसाई मैदान में हैं। कांग्रेस और शिवसेना ने उन 3 सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जहां उसकी सहयोगी सपा चुनाव लड़ रही है। इनमें भिवंडी पश्चिम, धुले शहर सीट शामिल है। कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र में अपना चुनावी अभियान नागपुर से शुरू करेगी। दीवाली बाद 6 नवंबर को कांग्रेस पार्टी ने नागपुर में संविधान बचाओ रैली का आयोजन किया है। इस रैली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे हिस्सा लेंगे। उसी दिन शाम को मुंबई में भी एक संयुक्त रैली प्रस्तावित है जिसमें उद्धव ठाकरे, शरद पवार समेत कांग्रेस के बड़े नेता हिस्सा लेंगे।
MVA की बात करें तो शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट, एनसीपी के शरद पवार गुट और कांग्रेस ने 11 सीटों के लिए आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। इस विपक्षी गुट में कांग्रेस ने 103 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं, शिवसेना के उद्धव ठाकरेगुट और शरद पवार 87 पर हैं। शरद पवार ने साफ़ कर दिया है ये संख्या अंतिम है, लेकिन 11 सीटों पर रहस्य बरकरार है। इनमें से कुछ सीटें छोटी सहयोगी पार्टियों और समाजवादी पार्टी के खाते में जाने की उम्मीद है, लेकिन इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि किसे क्या मिलेगा या कितनी सीटें मिलेंगी। विपक्षी खेमे में कई सप्ताह तक चली खींचतान के बाद यह अभूतपूर्व स्थिति बनी है। दूसरी तरफ दावा किया जा रहा है कि सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति ने कमोबेश अपना घर ठीक कर लिया है लेकिन इस कमोबेश में बहुत कुछ छुपा हुआ है जो अभी तक ने रहस्य बना हुआ है। अनिर्णय की स्थिति के साथ-साथ यहाँ नेताओं के बागी होने और निर्दलीय के रूप में नामांकन दाखिल करने का चलन भी देखने को मिल रहा है। सबसे बड़ा मामला अजीत पवार की एनसीपी के नवाब मलिक का है, जिन्होंने मनखुद सीट से दो नामांकन दाखिल किए थे – एक निर्दलीय के रूप में और दूसरा एनसीपी सदस्य के रूप में, लेकिन पार्टी ने समय सीमा से कुछ मिनट पहले ही उनका समर्थन कर दिया। भाजपा प्रवक्ता शाइना एनसी भी शिवसेना के टिकट पर मुंबादेवी से चुनाव लड़ती दिखीं। उनके नाम की घोषणा के बाद भी भाजपा के सदस्य उस सीट से दावेदारी करते नजर आए। वहीँ भाजपा को नवाब मालिक की दावेदारी पसंद नहीं आ रही है और उसके नेता खुलकर इस बात का विरोध कर रहे हैं कि दाऊद इबराहीम से सम्बन्ध रखने वाला महायुति के मंच से चुनाव कैसे लड़ सकता है लेकिन एनसीपी अजीत पवार गुट को नवाब मालिक की ज़िद के आगे झुकना पड़ा है. बहरहाल नामांकन वापसी के बाद ही ये स्थिति साफ़ होगी कि MVA और महायुति में घर कहाँ तक ठीक हैं.

