मेरठ। तेजी से बढ़ता तापमान (rise in temperature) जहां आम लोगों के जीवन पर असर डाल रहा है। वहीं यह अब फसलों को भी प्रभावित करने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तापमान चढ़ने के साथ इसका असर गेहूं की फसल (Wheat crop) पर पड़ेगा। जिससे किसानों की गेंहू की फसल के उत्पादन पर भी पड़ेगा। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार गेहूं की फसल के लिए तापमान बढ़ना कोई अनुकूल नहीं है। पिछले 20 साल में 1 मार्च से 20 मार्च तक तापमान कभी भी 37 डिग्री तक नहीं रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी 15—16 डिग्री तक ही सीमित रहा। लेकिन इस समय अधिकतम तापमान 37 और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री से ऊपर पहुंच रहा है। जिससे इसका असर गेंहू की फसल पर पड़ना शुरू हो गया है। यही हाल रहा तो गेहूं के उत्पादन पर काफी असर पड़ेगा।
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फरवरी माह में इस बार मौसम बहुत अच्छा रहा। ये मौसम गेंहू की फसल बढ़ने में काफी सहायक सिद्ध हुआ। अब मार्च के मौसम में एक बार फिर से तापमान बढ़ने लगा और इसका असर गेंहू की फसल पर पड़ने लगा। पिछले कुछ दिन से अधिकतम तापमान (Maximum temperature) 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक है जो कि गेहूं की फसल के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा। ऐसे समय मौसम में तेजी से परिवर्तन का होना सरसों और आलू की फसल के लिए भी ठीक नहीं। तेजी से तापमान के बढ़ने से पछेती प्रजाति अधिक प्रभावित होगी। वहीं इसका 20 से 25 प्रतिशत तक उत्पादन पर असर दिखाई देगा।
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कृषि शस्य विज्ञानी डा0 पीएन त्रिपाठी के अनुसार अधिक तापमान से गेहूं के पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फसल समय से पहले पकने लगती है। ऐसे में समय से पहले पकी फसल की बालियां छोटी और कमजोर हो जाती है। वहीं इसका असर गेंहू की गुणवत्ता और आकार पर भी पड़ता है। अधिक तापमान के कारण फसल पूरी तरह से पककर तैयार नहीं हो पाती।

