लखनऊ/गाजियाबाद। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे राकेश टिकैत का दर्द एक बार फिर उभरा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के बॉर्डरों पर किसानों ने 13 महीने तक आंदोलन किया। इसके बाद भी सरकार ने हमसे डिजिटल समझौता किया। हमने उनकी बात पर यकीन किया लेकिन उन्होंने हमसे अब तक कोई बातचीत नहीं की है। इस बात की तकलीफ हमेशा रहेगी।
राकेश टिकैत अंबेडकर पार्क में आयोजित जयंती के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आये थे। उन्होंने कहा कि देश में हर कौम एकदूसरे से लड़ रही है। हिंदू-मुसलमान, हिंदू-सिख और सिख-मुसलमान को आमने सामने कर दिया गया है। मोदी सरकार पर बरसते हुए उन्होंने कहा कि देश को नफरत की आग में झोंक दिया गया है। आम जनता को भी इनके इशारे को समझना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे आंदोलन को देश ने देखा है। आज सारी एजेंसियों को बंधक बना दिया गया है।
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डॉ. भीमराव अंबेडकर के बनाये संविधान को आलमारी में बंद करके रख दिया गया है। राकेश टिकैत ने कहा कि किसी ने भी उनकी किताब को खोलकर नहीं देखा है। आज पूरे देश को आपस में भिड़ाकर मोदी सरकार एक-एक चीज को बेचने पर तुली हुई हैञ टिकैत ने कहा कि दलित तो वो हर आदमी है जो गांव और खेत में रहता है। उन्होंने जातिवाद को समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि मुद्दों की लड़ाई जारी रहनी चाहिए।

