मेरठ। विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा का परंपरागत वोट बैंक जाटव और दलित वोट भाजपा को ट्रांसफर हुआ। जबकि पश्चिमी उप्र में जाट वोट बैंक पर भाजपा की पकड़ पहले की अपेक्षा अधिक मजबूत हुई है। यहां पर सपा रालोद गठबंधन के बाद भी भाजपा करिश्मा दिखाने में कामयाब रही। भाजपा ने विधानसभा चुनाव-2022 को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है। जिसमें इसका खुलासा हुआ है।
विधानसभा चुनाव 2022 में 122 सीटों पर बसपा ऐसे प्रत्याशी उतारे जो कि सपा द्वारा उतारे गए प्रत्याशियों की ही जात के थे। इन प्रत्याशियों में 91 मुस्लिम थे जबकि 15 यादव थे। इन सीटों पर एमवाई यानी मुस्लिम-यादव फैक्टर के चलते सपा के चुनाव जीत की प्रबल संभावना थी। लेकिन बसपा प्रत्याशियों ने सपा का खेल खराब कर दिया। जिसका लाभ भाजपा को मिला और इन 122 सीटों में से 68 भाजपा के खाते में चली गई।
Read also: यूपी विधानसभा चुनाव में दोपहर 3:00 बजे तक 46.28 परसेंट वह मतदान
भाजपा की तैयार की गई रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिमी उप्र में जाट मतदाता शहर और ग्रामीण भागों में बंट गया। शहर के जाट वोटरों ने भाजपा को अपना मत दिया। जबकि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले जाट मतदाताओं ने सपा-रालोद गठबंधन को चुनाव। भाजपा ने 17 जाट प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे थे। जिसमें से दस चुनाव जीत गए। वहीं सपा-रालोद गठबंधन ने 17 जाट प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। इनमें से मात्र सात ही जीत सके। इनमें भी तीन सपा के और चार रालोद के जाट विधायक हैं।
भाजपा की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी यूपी में सपा के अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की जोड़ी का अधिक असर नहीं दिखाई दिया। पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन के बाद भी इससे प्रभावित 30 सीटों पर रालोद चुनाव लड़ी। जिसमें से मात्र आठ पर ही जीत हासिल कर सकी। वहीं चौकाने वाली बात ये है कि इस बार सवर्ण वोट सपा को गया है। विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान उन जिलों में हुए। जहां किसान आंदोलन का असर था। लेकिन चुनाव परिणाम अपेक्षा से अधिक अच्छा भाजपा के पक्ष में रहा। पहले चरण में भाजपा को 58 में से 46 सीटें मिली।
Read also: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करती दिखाई दे रही भाजपा : सर्वे

