लखनऊ। दशकों तक अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के साथ सपा में रहकर जमीनी राजनीति करने और सपा सरकार में अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहे शिवपाल यादव ने अब अपनी राह बदल दी है। हालांकि यह कोशिश उन्होंने 2017 में भी की थी। लेकिन उस दौरान मुलायम के बीच में आने के बाद शिवपाल चुप हो गए थे। लेकिन अब शिवपाल ने अपनी राजनैतिक राह को जुदा कर लिया है। बता दें कि सपा को यूपी में मुलायम सिंह यादव के साथ मजबूत देने वाले शिवपाल आज भतीजे अखिलेश से काफी आहत हो चुके हैं। हालांकि शिवपाल ने अपनी अलग पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन कर लिया था।
लेकिन अब वे सपा और अखिलेश यादव को बड़ा झटका देने की तैयारी कर चुके है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल अब भाजपा में शामिल होकर भगवा पटका पहनने जा रहे हैंं। भाजपा में अगर शिवपाल शामिल हुए तो उनको राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं उनके बेटे आदित्य को भाजपा शिवपाल की परंपरागत सीट जसवंतनगर से विधानभा भेजेगी। भाजपा का यह राजनैतिक प्लान सफल हुआ तो शिवपाल को केंद्र की राजनीति में जगह मिलने के साथ ही उनके बेटे का राजनैतिक भविष्य भी तय हो जाएगा। जिसकी तलाश में वे 2012 से लगे हुए हैं।
शिवपाल के भाजपा में आने के बाद भाजपा शिवपाल यादव के सहारे यादव बेल्ट पर निशाने साधने की कोशिश करेगी।
भाजपा लाख कोशिश के बाद भी यादव बेल्ट में सफल नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि भाजपा अब शिवपाल के सहारे यादव बेल्ट में अपनी पैठ बनाएगी। इटावा, कन्नौज,मैनपुरी, फिरोजाबाद के अलावा फर्रुखाबाद जिले सपा गढ़ माने जाते हैं। इन जिलों में यादवों की मतदाता संख्या बड़ी आबादी में है। जिसके चलते इन जिलों की विधानसभा सीटों पर साइकिल दौड़ती रही है। यादव बाहुल्य इस बेल्ट पर शिवपाल यादव की पकड़ बेहद मजबूत है। शिवपाल ने सपा के लिए इन जिलों में गांव-गांव घूमकर जमीनी स्तर पर काम किया। शिवपाल यादव का यहा बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ व्यक्तिगत संबंध है। भाजपा 2024 के आम चुनाव से पहले इस यादव बेल्ट में अपनी जमीन पकड़ शिवपाल के सहारे मजबूत करने की कोशिश में है।

