मेरठ। सपा विधानसभा चुनाव क्या हारी। इसका सबसे अधिक प्रभाव मुलायम के कुनबे पर पड़ा है। 2017 के चुनाव की तरह ही इस बार 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा के भीतर राजनैतिक कशमकश भतीजे अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल सिंह यादव के बीच चलती रही। लेकिन सपा संस्थापक और घर के मुखिया मुलायम के दखल के बाद टीपू यानी अखिलेश और चाचा शिवपाल बैकफुट पर आ गए। दोनों ने एक दूसरे से हाथ मिला लिया।
खुद मुलायम और सपा समर्थक ये अंदाजा लगाए बैठे थे इस बार सपा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। लेकिन मतदाताओं ने सभी राजनैतिक कयासों और अंदाजों की धज्जियां उड़ा दी। चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में आया। लेकिन यहीं से चाचा शिवपाल के दुर्दिन शुरू हो गए। भतीजे टीपू ने शिवपाल को भाव देना बंद कर दिया तो चाचा भाजपा खेमे की ओर लपके। अब यही कयास लगाए जा रहे हैं कि चाचा शिवपाल का अगला कदम क्या! प्रदेश की राजनीति में भी इस समय शिवपाल के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है।
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प्रगतिशील समाजवाद पार्टी (प्रसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने भाजपा में शामिल होने के लिए कदम तो बढ़ाया लेकिन इसी बीच उपमुख्ममंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी यह कह दिया कि अभी वैकेंसी नहीं है,जब होगी तब देखा जाएगा। शिवपाल का भाजपा में जाने का फैसला अभी भले ना हुआ हो लेकिन सपा से उनकी राहे अब एक बार फिर से अलग हो चुकी है। शिवपाल यादव ने तय किया है कि वे सपा गठबंधन में नहीं रहेंगे।
यह माना जा रहा है कि शिवपाल यादव आगामी दो तीन दिन में अपना राजनैतिक कदम उठा लेंगे और इसकी घोषणा भी कर देंगे। इतना सब कुछ होने के बाद भी भतीजे टीपू यानी अखिलेश यादव की तरफ से भी उनको मनाने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि मुलायम सिंह ने शिवपाल को कोई भी फैसला करने की छूट दे दी है।
सूत्रों की माने तो आज नेताजी को इस बात का पश्चाताप है कि उनके साथ सपा को इस स्थिति में पहुंचाने वाले शिवपाल की आज उपेक्षा हो रही हैं।

