AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, राजद मुखिया लालू प्रसाद यादव के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया PFI पर प्रतिबन्ध लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है, मायावती ने कहा अगर PFI पर प्रतिबन्ध लगाया गया है तो फिर उसी की तरह के दूसरे संगठनों जिसमें आरएसएस भी शामिल है, उसपर प्रतिबन्ध क्यों नहीं? बता दें PFI को एक इस्लामिक संगठन बताया जा रहा है जबकि वो राजनीतिक संगठन होने की बात कर रहा है.
मायावती शुक्रवार को अपने दो ट़्वीट में PFI के साथ आरएसए पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग का समर्थन करते हुए नज़र आईं. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि पीएफआई के खिलाफ पहले देश भर में कार्रवाई के बाद अब गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनावों से पहले PFIपर प्रतिबन्ध लगा दिया गया, सरकार की इस कार्रवाई को लोग राजनीतिक स्वार्थ व संघ तुष्टीकरण की नीति मान रहे हैं, केंद्र की इस कार्रवाई से लोगों में संतोष कम व बेचैनी ज्यादा है। मायावती ने एक अन्य ट़्वीट में कहा कि इसी वजह से विपक्षी पार्टियां सरकार की खोटी नीयत पर आक्रोशित व हमलावर हैं और RSS पर भी प्रतिबंध लगाने की खुलेआम मांग हो रही है. मायावती ने कहा कि अगर पीएफआई देश की सुरक्षा के लिए खतरा है तो आरएसएस भी उसी जैसा संगठन है, उसपर प्रतिबंध क्यों नहीं लगना चाहिए?
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को PFI के अलावा उसके आठ सहयोगी संगठनों रिहैब इंडिया फाउंडेशन, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन, नेशनल विमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल UAPA कानून के तहत 5 साल के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है.

