कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है, हालांकि अभी दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे का ऐलान नहीं हुआ है और इसे लेकर घाटी में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
जो खबरें सामने आई हैं, उनके मुताबिक चुनाव के चरण दर चरण सीटों का बंटवारा किया जाएगा, फिलहाल पहले चरण की 24 सीटों के लिए दोनों पार्टियों के बीच बातचीत चल रही है। कांग्रेस इन 24 में से 9 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जिनमें से पांच सीटें जम्मू क्षेत्र की और चार सीटें कश्मीर क्षेत्र की हैं।
जहां तक कश्मीर क्षेत्र की चार सीटों का सवाल है, तो इनमें से दो देवसर और शांगस पर 2014 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, जबकि तीसरी डुरू विधानसभा सीट पर गुलाम अहमद मीर पीडीपी उम्मीदवार से 161 वोटों के मामूली अंतर से हार गए थे। कांग्रेस चौथी कोकर नाग विधानसभा सीट मांग रही है, जहां से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीरजादा मोहम्मद सैयद आते हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव में यहां से पीडीपी ने जीत दर्ज की थी।
देखा जाए तो एनसी के साथ गठबंधन में कांग्रेस पार्टी पिछले चुनाव में खुद की जीती सीटों के अलावा पीडीपी की जीती सीटों में भी हिस्सेदारी मांग रही है। कांग्रेस ने 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार भी तय कर लिए हैं। गठबंधन में बाकी सीटें फंसने के कारण घोषणा नहीं हो पाई। नेशनल कांफ्रेंस को कांग्रेस द्वारा जम्मू की पांच सीटों पर दावा करने से कोई दिक्कत नहीं है, दिक्कत घाटी की सीटों पर दावा करने में है।
उधर, कांग्रेस और एनसी के बीच गठबंधन की घोषणा के बाद भाजपा ने हमला बोला है और कहा है कि सत्ता के लालच ने कांग्रेस और एनसी को गठबंधन में ला खड़ा किया है। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह गठबंधन कश्मीर में अनुच्छेद 370 को वापस लाएगा और अशांति फैलाएगा। कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के हमले का जवाब देने में देर नहीं लगाई और कहा कि जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को मिल रहा प्यार देखकर भाजपा घबरा गई है। कांग्रेस प्रभारी भरत भाई सोलंकी ने कहा कि उनकी पार्टी एनसी के साथ न्यूनतम साझा कार्यक्रम रखेगी। भाजपा को चालाक पार्टी बताते हुए सोलंकी ने कहा कि वह सत्ता के लिए देश के किसी भी कोने में किसी से भी गठबंधन कर लेती है।

